उत्तर प्रदेश की राजनीति के ‘सुल्तान’ अखिलेश यादव की कहानी
दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, इसलिए यूपी की राजनीति की खास अहमियत है। इस धरती से कई होनहार नेता निकले जिन्होंने जनता के दिलों में राज किया, जिनमें से एक सबसे युवा मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव भी हैं।
अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को इटावा के सैफई गांव में हुआ। वे मुलायम सिंह यादव और मालती देवी के पुत्र हैं। शुरुआती पढ़ाई इटावा के सेंट मैरी स्कूल से हुई, फिर उन्होंने राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल और मैसूर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद सिडनी यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया से परास्नातक की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे।
राजनीति में कदम 27 साल की उम्र में रखा, जब 2000 में कन्नौज लोकसभा उपचुनाव जीतकर सांसद बने। 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में भी लगातार जीत दर्ज की। मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी (सपा) की प्रदेश इकाई का नेतृत्व अखिलेश को सौंपा।
2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने 224 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया, जिसका श्रेय अखिलेश की रणनीति और मेहनत को दिया गया। 15 मार्च 2012 को वे 38 वर्ष की उम्र में उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने मेट्रो परियोजनाओं, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे, युवाओं को लैपटॉप वितरण, महिलाओं को पेंशन योजना जैसे कई विकासात्मक कार्य किए।
2016 में यादव परिवार में सत्ता संघर्ष शुरू हुआ, जब अखिलेश और शिवपाल सिंह आमने-सामने आ गए। जद्दोजहद के बाद अखिलेश ने पार्टी की कमान संभाली, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा को भारी हार का सामना करना पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन किया, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली। 2022 में भी बीजेपी को हराने की कोशिश सफल नहीं रही।
अखिलेश की राजनीतिक प्रयोगों में लगातार असफलता आई, लेकिन वे 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर से राहुल गांधी के साथ गठबंधन कर यूपी में मजबूत प्रदर्शन कर पाए।
अखिलेश यादव और डिंपल यादव की प्रेम कहानी भी खास है। दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई। शादी 24 नवंबर 1999 को हुई और उनके तीन बच्चे हैं। वे फुटबॉल, क्रिकेट के शौकीन हैं और खाली वक्त में किताबें पढ़ना, म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं।
अब अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं और यूपी में अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

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