अखिलेश यादव का बड़ा दांव, अब दूध पर भी मिलेगी MSP!

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किसानों को साधने के लिए अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। गाजियाबाद में आयोजित 'किसान संवाद' और 'विजन इंडिया कॉन्क्लेव' के दौरान अखिलेश यादव ने घोषणा की कि यदि 2027 में सपा की सरकार बनती है, तो किसानों को दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिया जाएगा और गन्ना भुगतान महज 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के चुनावी एजेंडे में 'अन्नदाता' सर्वोपरि है। गाजियाबाद के कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़ते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

दूध पर MSP: देश में संभवतः यह पहली बार होगा जब किसी राज्य में दूध पर भी एमएसपी लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा। इससे पशुपालकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलेगी।

गन्ना भुगतान का नया रिकॉर्ड: पश्चिमी यूपी के किसानों की सबसे बड़ी समस्या गन्ना भुगतान की देरी है। अखिलेश ने वादा किया है कि चीनी मिल द्वारा गन्ना खरीद के 24 घंटे के भीतर पैसा सीधे किसान के खाते में होगा।

किसान आयोग का गठन: किसानों की समस्याओं के कानूनी समाधान और एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनकी मांगों को पूरा करने के लिए एक उच्च स्तरीय 'किसान आयोग' बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

किसान संवाद के दौरान सपा प्रमुख ने पुरानी घोषणाओं को दोहराते हुए अपनी रणनीति साफ कर दी। पार्टी का लक्ष्य समाज के हर तबके को राहत देना है:

300 यूनिट मुफ्त बिजली: हर घरेलू कनेक्शन पर 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने के साथ ही, उसके बाद की खपत पर फ्लैट रेट चार्ज करने का प्रस्ताव है। किसानों को खेती की लागत कम करने के लिए सिंचाई हेतु मुफ्त बिजली दी जाएगी।
महिलाओं के लिए 40,000 रुपये पेंशन का वादा कर सपा ने महिला वोट बैंक में भी सेंध लगाने की तैयारी कर ली है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा का 'घोषणा-पत्र' एसी कमरों में बैठकर नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर तैयार हो रहा है। 'विजन इंडिया कॉन्क्लेव' में किसानों और कृषि विशेषज्ञों से मिले सुझावों को सीधे पार्टी के संकल्प पत्र में शामिल किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने गाजियाबाद न पहुंच पाने के बावजूद वर्चुअली जुड़कर कार्यकर्ताओं में जोश भरा और यह संदेश दिया कि 2027 की जंग में समाजवादी पार्टी विकास और किसान कल्याण के मुद्दे पर कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

सपा प्रमुख की ये घोषणाएं उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ सकती हैं। विशेषकर दूध पर MSP और 24 घंटे में गन्ना भुगतान ऐसे मुद्दे हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकते हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी के 'डबल इंजन' के मुकाबले अखिलेश का यह 'किसान विजन' जनता को कितना लुभा पाता है।

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