अखिलेश ने खोला BJP के सीट बंटवारे का राज! RLD 73, सुभासपा 39 सीटें?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं... लेकिन सियासी तापमान अभी से चढ़ने लगा है। चुनावी रण में असली मुकाबला भले अगले साल होगा, लेकिन पार्टियों ने अभी से अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐसा दावा किया है, जिसने यूपी की गठबंधन राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। जी हां अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर दावा किया कि बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में अपने सहयोगी दलों को कुल 162 सीटें देने की तैयारी कर रही है। दावा भी ऐसा कि सुनते ही सवाल उठने लगे कि क्या बीजेपी अपने सहयोगियों के लिए इतनी बड़ी संख्या में सीटें छोड़ने जा रही है? आइए जानते हैं। 

दरअसल, अखिलेश यादव ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी अपनी हार सामने देखकर और पीडीए के दबाव-जवाब में अपने सहयोगी दलों को इधर-उधर छटकने से बचाने के लिए कुछ चुनावी विशेषज्ञों की सलाह पर सीटों के बंटवारे की योजना पर काम कर रही है। अखिलेश के मुताबिक इस कथित फॉर्मूले में...

आरएलडी को 73 सीटें,
सुभासपा को 39 सीटें,
निषाद पार्टी को 31 सीटें,
और अपना दल को 19 सीटें।
यानि कुल मिलाकर 162 सीटें।

आपको बता दें उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। यानी अखिलेश यादव के दावे को अगर गणित में रखें तो बीजेपी के पास करीब 241 सीटें बचेंगी। हालांकि अखिलेश यादव ने इन आंकड़ों का आधार सूत्रों को बताया है। बीजेपी की तरफ से ऐसी सीट शेयरिंग का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। यानी फिलहाल ये दावा है, तय फॉर्मूला नहीं। दरअसल, सपा प्रमुख का राजनीतिक मकसद साफ है कि वे जनता के सामने यह नैरेटिव पेश करना चाहते हैं कि बीजेपी पीडीए के सामाजिक समीकरण से इस कदर डर गई है कि उसे अपने सहयोगियों के सामने नतमस्तक होना पड़ रहा है। साथ ही, बीजेपी के अंदरूनी कार्यकर्ताओं और दावेदारों के बीच यह मैसेज भेजना कि अगर इतनी सीटें सहयोगियों को दी गईं, तो बीजेपी के अपने नेताओं के टिकट कट जाएंगे। 

हालांकि, अखिलेश ने सिर्फ सीटों का आंकड़ा ही जारी नहीं किया, बल्कि बीजेपी सरकार पर बेरोजगारी, महंगाई, 69000 शिक्षक भर्ती घोटाले, बुलडोजर कार्रवाई, पेपर लीक और अग्निवीर योजना को लेकर बेहद तीखे हमले भी बोले। उन्होंने दावा किया कि जनता इस सरकार को विदा करने के लिए उतावली बैठी है और यह योजना भी पूरी तरह असफल होगी। इतना ही नहीं, उन्होंने पुलिस हिरासत में मौतों, स्कूल-कॉलेजों की स्थिति, शिक्षकों से जुड़े मामलों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आंदोलनों का भी जिक्र किया। व्यापारियों और कारोबारियों से लेकर खिलाड़ियों और कलाकारों तक के मुद्दे उठाते हुए अखिलेश ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। अखिलेश यादव ने संविधान बदलने की साजिश का आरोप लगाते हुए बीजेपी और उसके सहयोगियों को जनता द्वारा पूरी तरह नकारे जाने का दावा भी किया। यानी अखिलेश का सोशल मीडिया पोस्ट सिर्फ सीटों के बंटवारे का दावा नहीं था। उस पोस्ट में एक साथ कई राजनीतिक संदेश थे। जैसे...

पहला संदेश-बीजेपी को सहयोगियों की जरूरत है।

दूसरा संदेश-बीजेपी के सहयोगी ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं।

तीसरा संदेश-पीडीए के सामाजिक समीकरण के मुकाबले बीजेपी अपने गठबंधन के जरिए जवाब तैयार कर रही है।

और चौथा संदेश-अखिलेश चुनाव से काफी पहले ही बीजेपी के गठबंधन की कमजोरी को मुद्दा बनाना चाहते हैं।

आपको बता दें अखिलेश यादव के दावे में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा आरएलडी की 73 सीटों का है। क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और आरएलडी साथ लड़े थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आरएलडी को 33 सीटें दी थीं। आरएलडी ने इनमें से 8 सीटों पर जीत हासिल की थी। उसका वोट शेयर करीब 2.92 प्रतिशत रहा था। बाद में उपचुनावों में जीत के बाद आरएलडी के मौजूदा विधायकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई। लेकिन चुनावी नतीजों में तस्वीर कुछ अलग रही। आरएलडी को तो आठ सीटें मिलीं, लेकिन समाजवादी पार्टी को पश्चिमी यूपी में उम्मीद के मुताबिक बड़ा फायदा नहीं मिला। यही वजह थी कि बाद में दोनों दलों की राह अलग हो गई। वहीं अब अगले विधानसभा चुनाव में आरएलडी बीजेपी से कितनी सीटें मांगती है, यही एक बड़ा सवाल है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो अखिलेश यादव का यह कदम यूपी की राजनीति का एक बेहद सोची-समझी चाल वाला माइंड गेम माना जा रहा है। अखिलेश जानते हैं कि यूपी में सीटों की संख्या सिर्फ चुनाव लड़ने का जरिया नहीं होती, बल्कि यह किसी भी दल का राजनीतिक कद और रसूख तय करती है। अखिलेश यादव ने 162 सीटों का ऐसा आंकड़ा फेंक दिया है, जिस पर भले ही आसानी से भरोसा न हो, लेकिन इसने एनडीए के खेमे में बहस जरूर छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ सीटों का असल तालमेल कैसे बैठाती है। क्या अखिलेश का यह माइंड गेम एनडीए में दरार डालने में कामयाब होगा या फिर बीजेपी अपने सहयोगियों को एकजुट रखकर इस सियासी चक्रव्यूह को काट पाएगी? यूपी की राजनीति में शह-मात का यह खेल अब और दिलचस्प हो गया है! 

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