अखिलेश का वार- "सरकार झुक गई"...प्रियंका के बयान पर बीजेपी भड़की

अब बात करेंगे संसद के अंदर छिड़ी उस सियासी जंग की...जहां मुद्दा था एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक...लेकिन बहस पहुंच गई सरकार की नीयत, युवाओं के गुस्से, आंदोलन की ताकत और सत्ता के अहंकार तक। जी हां लोकसभा में परीक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हुई...तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर ऐसा हमला बोला कि सदन का माहौल गरमा गया। अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि...सरकार को अहंकार था कि वह कभी नहीं झुकेगी...लेकिन देश के युवाओं ने अपने आंदोलन से सरकार को झुका दिया। 

अखिलेश ने दावा किया कि छात्रों के आंदोलन का ही असर है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने प्रधान को हटा दिया, लेकिन प्रधानमंत्री को बचा लिया। अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद के बाहर हुए स्वागत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मंत्री के जाने पर उनका स्वागत हुआ, इसमें कोई शिकायत नहीं है। लेकिन उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कई सांसदों को यह देखकर राहत मिली होगी कि उन्हें एक बड़े संकट से बचा लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रधान को हटा दिया, लेकिन प्रधानमंत्री को बचा लिया। इतना ही नहीं अखिलेश यादव ने सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा वचन नहीं देती... बल्कि सिर्फ जुमले देती है। 

आपको बता दें अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा उठाकर भी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा...जो सरकार अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाई, वह पेपर लीक कैसे रोक पाएगी? उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा ही नहीं बल्कि गुप्तदान तक चोरी हुआ है। अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे कामों के लिए भगवान भी सरकार को माफ नहीं करेंगे। 

वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि आंदोलन के बाद कानून बनाना बेहतर है या आंदोलन दबाने के लिए देश में आपातकाल लगाना? रिजिजू के इस बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा है...लेकिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ जो हुआ, वह किसी आपातकाल से कम नहीं था। 

वहीं दूसरी तरफ विवाद और बढ़ गया जब लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र की नई शिक्षा सुधार समिति के एक सदस्य को "गोमूत्र विशेषज्ञ" कह द‍िया। उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों का मतलब आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी. कामाकोटी से जोड़ा गया। प्रि‍यंका के इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक नया विवाद शुरू हो गया है। बीजेपी सांसदों ने प्र‍ियंका के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।  वहीं प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद का अपमान कर रही हैं। 

तो कुल मिलाकर देखा जाए तो संसद के भीतर का यह संग्राम साफ बता रहा है कि आने वाले दिनों में यह आग ठंडी होने वाली नहीं है! लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा सिर्फ एक कानून तक सीमित नहीं रही...बल्कि यह बहस पहुंच गई देश के युवाओं के भविष्य, परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, सरकार की जवाबदेही और विपक्ष के हमलों तक। एक तरफ सरकार का दावा है कि नया कानून पेपर लीक माफिया और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता खोलेगा...तो वहीं विपक्ष का कहना है कि सिर्फ कानून बनाने से नहीं, बल्कि सिस्टम में जमी खामियों को दूर करने से ही छात्रों का भरोसा वापस लौटेगा। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नया संशोधन विधेयक देश की परीक्षा व्यवस्था में सचमुच बदलाव ला पाएगा? क्या लाखों छात्रों का टूटा हुआ भरोसा दोबारा कायम हो पाएगा? या फिर यह भी सिर्फ राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगा? फिलहाल नजरें संसद की आगे की कार्यवाही पर हैं...क्योंकि देश का युवा अब सिर्फ भाषण नहीं...बल्कि एक ऐसी व्यवस्था चाहता है, जहां उसकी मेहनत का फैसला ईमानदार और पारदर्शी तरीके से हो।

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