'जुबान पर लगाम लगाओ वरना...' जब अखिलेश के सामने पेश हुए राजकुमार भाटी

ब्राह्मणों पर दिए गए एक विवादित बयान से उपजे भारी बवाल के बीच, समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में एक ऐसी हाई-प्रोफाइल मुलाकात हुई, जिसने पूरे सूबे की राजनीति में खलबली मचा दी है। अपने बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सपा के मुख्य प्रवक्ता राजकुमार भाटी जब सीधे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के सामने पेश हुए, तो सियासी पंडितों की सांसें थम गईं। हर कोई यह जानने को बेताब था कि बंद कमरे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का रुख क्या होगा। और अब जो इनसाइड स्टोरी निकलकर सामने आई है, उसने यह साफ कर दिया है कि 2027 की बिसात बिछा रहे अखिलेश यादव इस वक्त किसी भी तरह की गलती करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं! दरअसल, जैसे ही राजकुमार भाटी सपा दफ्तर पहुंचे, अखिलेश यादव ने उनके साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। लेकिन इस बातचीत का जो सबसे खास हिस्सा था, वो था अखिलेश यादव का सख्त निर्देश। 

सपा प्रमुख ने भाटी के विवादित बयान पर गहरी नाराजगी जताते हुए कड़े और साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी भाषा में तुरंत संयम बरतें। आपको बता दें कि भाटी के बयान के बाद न सिर्फ बीजेपी नेता ने उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दी थी, बल्कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सीधे अखिलेश यादव से माफी की मांग कर डाली थी। चौतरफा घिरे अखिलेश ने इस डैमेज कंट्रोल के जरिए संगठन के उन नेताओं और बड़बोले कार्यकर्ताओं को भी इशारों-इशारों में अनुशासन और मर्यादा का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है जो पार्टी की बनी-बनाई लाइन को बिगाड़ रहे हैं। वहीं क्लास लगाने के बाद अखिलेश यादव ने भाटी के सामने अपनी उस सियासी रणनीति का पत्ता भी खोला, जिसके दम पर वह लखनऊ के सिंहासन पर दोबारा काबिज होना चाहते हैं। अखिलेश ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को बचाकर ही सामाजिक न्याय के राज की स्थापना की जा सकती है, और इसके लिए सबको एकजुट रहना होगा। 

जाहिर है सियासी गलियारों का पारा अब सातवें आसमान पर है! खुद समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सब ठीक है। लेकिन इस मुलाकात की जो सबसे बड़ी कहानी है, वो यही है कि अखिलेश यादव ने एक तीर से दो शिकार किए हैं। एक तरफ जहां उन्होंने ब्राह्मणों की नाराजगी को कम करने के लिए अपने मुख्य प्रवक्ता के पर कतर दिए, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित अगड़ों का नाम लेकर यह भी साफ कर दिया कि 2027 की लड़ाई के लिए उन्हें किसी भी जाति से बैर मंजूर नहीं है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिली इस हिदायत के बाद राजकुमार भाटी और सपा के दूसरे सिपहसालार अपनी जुबान पर कितना लगाम लगा पाते हैं और बीजेपी-बसपा के इस चक्रव्यूह से पार्टी को कैसे बाहर निकालते हैं!

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