37 सांसदों वाली सपा अब असम की 5 सीटों पर ठोकेगी ताल

अब बात करते हैं देश की सियासत में आए उस भूचाल की, जिसने लखनऊ से लेकर गुवाहाटी तक हलचल मचा दी है! क्या आपने कभी सोचा था कि उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, जो दिल्ली की संसद में तीसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, वो अचानक पूर्वोत्तर के जंगलों और चाय के बागानों में अपना परचम लहराने पहुँच जाएगी? जी हां! अखिलेश यादव ने वो बड़ा कदम उठा लिया है, जिसने बीजेपी और क्षेत्रीय दलों की नींद उड़ा दी है। समाजवादी पार्टी अब सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं रहना चाहती। बल्कि असम के विधानसभा चुनाव 2026 में अखिलेश अपनी साइकिल चलाने जा रहे हैं। और उधर...यूपी के नोएडा में बीजेपी के अजेय किले को ढहाने के लिए दादरी से हुंकार भरने की तैयारी है। आखिर क्या है अखिलेश का गेम प्लान? चलिए देखते हैं सपा की इस पूरी इनसाइड स्टोरी!

दरअसल, समाजवादी पार्टी ने असम की 5 सीटों पर चुनाव लड़ने का पक्का मन बना लिया है। यह फैसला कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। आपको बता दें सपा उन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी जहाँ मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। पार्टी को उम्मीद है कि यूपी की तरह असम में भी उसे इस वर्ग का बड़ा समर्थन मिलेगा। सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव खुद असम की गलियों में प्रचार करते नजर आएंगे ताकि पार्टी की मौजूदगी को गंभीरता से लिया जाए।
दरअसल, लोकसभा में 37 सांसदों के साथ सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन कागजों पर आज भी वह एक 'राज्य स्तरीय दल' ही है। ऐसे में चुनाव आयोग के कड़े नियमों को तोड़ने के लिए अखिलेश ने यह मास्टरप्लान बनाया है। अब ये नियम क्या है? ये भी आइए जान लेते हैं। दरअसल नियम के मुताबिक राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए कम से कम 4 राज्यों में 6% वोट चाहिए, या फिर 3 अलग-अलग राज्यों से 11 लोकसभा सीटें। ऐसे में सपा के पास सीटें तो 37 हैं, लेकिन वो सभी सिर्फ यूपी से हैं। इसीलिए महाराष्ट्र, गुजरात और अब असम के जरिए सपा अपना वोट शेयर और राजनीतिक पहुंच बढ़ाना चाहती है।

असम तो एक मोर्चा है, लेकिन असली जंग यूपी 2027 की है। अखिलेश ने इसके लिए नोएडा के दादरी को चुना है, जिसे बीजेपी का अभेद्य गढ़ माना जाता है। 2027 की शुरुआत में ही अखिलेश नोएडा के दादरी से चुनावी शंखनाद करेंगे। आपको बता दें ऐसा इसलिए है क्योंकि दादरी में करीब 2 लाख गुर्जर मतदाता हैं। राजकुमार भाटी और सुधीर भाटी की अगुवाई में सपा इस पारंपरिक भाजपा वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी में है। खबर है कि इस रैली में बीजेपी और रालोद के कई नाराज दिग्गज सपा का दामन थाम सकते हैं। वहीं यूपी के बाहर अगर सपा के ट्रैक रिकॉर्ड की बात करें तो...

2024 में महाराष्ट्र में 2 सीटें जीती

2022 में गुजरात में 1 सीट 

2023 में मध्य प्रदेश में 71 सीटों पर लड़े, भले ही सीट नहीं मिली लेकिन कांग्रेस का खेल बिगाड़कर अपनी ताकत दिखाई।

2003 में मध्य प्रदेश में सपा के 7 विधायक थे, जिसे पार्टी फिर से दोहराना चाहती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो अखिलेश यादव का संदेश साफ है कि अब साइकिल सिर्फ एक्सप्रेसवे पर नहीं, बल्कि असम के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और नोएडा की हाई-टेक गलियों में भी दौड़ेगी। लक्ष्य बड़ा है। नेशनल पार्टी का दर्जा हासिल करना और 2027 में लखनऊ की गद्दी पर फिर से काबिज होना। ऐसे में सवाल है कि क्या अखिलेश की ये 'सीमा लांघो' नीति सफल होगी? या बीजेपी का गढ़ बचा रहेगा? खैर ये तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि 2027 का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है! 

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