आरक्षण से पहले जनगणना - PDA फैक्टर से गरमाई सियासत!
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण को लेकर भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक नई जनगणना नहीं होती, तब तक इस मुद्दे पर बहस करना बेकार है। अगर गिनती ही गलत होगी, तो आरक्षण सही कैसे होगा। महिला आरक्षण का आधार कुल सीटों का एक तिहाई है, जो पूरी तरह गणित पर आधारित है। ऐसे में सही आंकड़े होना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर महिलाओं को आरक्षण देने की बात करना गलत है। जब आधार ही कमजोर होगा, तो परिणाम भी सही नहीं होगा।
इसलिए सरकार पहले जनगणना कराए, उसके बाद ही महिला आरक्षण पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि जो सरकार महिलाओं की सही संख्या तक दर्ज नहीं करना चाहती, वह उन्हें न्याय कैसे दे सकती है। इसके साथ ही बिजली के स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार और कंपनियों पर निशाना साधा।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित विधेयक के आधार पर सवाल उठाते हुए रविवार को कहा कि संसद व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करने से पहले नयी जनगणना पूरी करना जरूरी है।
यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि किसी भी नीति की नींव सटीक आंकड़ों पर होनी चाहिए और तर्क दिया कि यदि महिला आरक्षण का ढांचा 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों पर आधारित है, तो वह स्वाभाविक रूप से त्रुटिपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, दरअसल महिला आरक्षण बिल का तो आधार ही निराधार है। आरक्षण का आधार अगर कुल सीट का एक तिहाई है तो इसका मतलब हुआ कि ये गणित का विषय है और गणित का आधार अंक होते हैं, संख्याएं होती हैं, कोई हवा हवाई बात नहीं। और इस तरह के मामले में संख्या का आधार जनसंख्या होती है, जिसका आधार जनगणना होती है।
सपा अध्यक्ष ने कहा, जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती है, वो भला उन्हें आरक्षण क्या देगी। महिलाओं के साथ भाजपा और उनके संगी-साथी जो धोखा करना चाहते हैं, महिलाओं के साथ वो छलावा हम नहीं होने देंगे। कुल मिलाकर सरकार से हमारा ये कहना है। जब तक जनगणना नहीं, तब तक महिला आरक्षण पर बहस करना नहीं।
उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिन के लिए बढ़ा दिया गया है ताकि लोकसभा एव राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 2023 में पारित कानून को 2029 से लागू किया जा सके। बृहस्पतिवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने राज्यसभा में कहा था कि सदन जल्द ही एक महत्वपूर्ण विधेयक पर विचार करने के लिए फिर से बैठक करेगा।

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