काशी से शंखनाद करेंगे अखिलेश: 'पटेल-ब्राह्मण-भूमिहार' गठजोड़ से BJP को घेरने का प्लान
वाराणसी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल की राजनीति को साधने के लिए समाजवादी पार्टी ने सबसे बड़ा सियासी दांव चल दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव 31 अक्टूबर को वाराणसी के अकेलवां में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने पहुंच रहे हैं। बीजेपी के मुख्य रणनीतिक केंद्र से इस रैली की शुरुआत करने के पीछे सपा का मकसद पूर्वांचल में बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक—विशेषकर पटेल, ब्राह्मण और भूमिहार समाज—में बड़ी सेंधमारी करना है।
पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल को मिली तैयारियों की कमान
अकेलवां में आयोजित होने वाली इस विशाल रैली की सफलता के लिए सपा कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। आयोजन की कमान संभाल रहे पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल ने तैयारियों का जायजा लेने के बाद कहा कि 31 अक्टूबर को देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। इस पावन अवसर पर काशी की धरती से अखिलेश यादव जन-जन तक सरदार पटेल की विचारधारा को पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं में इस रैली को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।
रोहनिया और सेवापुरी समेत 5 सीटों पर पटेल फैक्टर अहम
वाराणसी जिले की रोहनिया, सेवापुरी, पिंडरा, शिवपुर और अजगरा विधानसभा सीटों पर पटेल मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। 2024 के आम चुनाव के आंकड़ों के बाद यह बात सामने आई थी कि कुछ इलाकों में पटेल मतदाताओं ने बीजेपी से दूरी बनाई थी। सपा अब इसी खाई को भरते हुए पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। यही वजह है कि अखिलेश यादव ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए वाराणसी को चुना है, ताकि बीजेपी को उसी के गढ़ में कड़ी चुनौती दी जा सके।
कांग्रेस का मिला साथ, 'इंडिया' गठबंधन का दिखेगा असर
सपा की इस रणनीति को कांग्रेस का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने वाराणसी में अखिलेश यादव की इस जनसभा का स्वागत करते हुए कहा कि पूर्वांचल का जनमानस अब बदलाव के मूड में है। उन्होंने दावा किया कि पटेल समुदाय के साथ-साथ ब्राह्मण और भूमिहार समाज का झुकाव भी अब सत्ताधारी दल के बजाय गठबंधन की तरफ बढ़ रहा है। जनसभा में सपा और कांग्रेस के तमाम दिग्गजों के जुटने से पूर्वांचल का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमाने के आसार हैं।

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