मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायतराज अभियान में ग्रामसभा न होने का मामला-जिला परिषद के सीईओ की कार्यशैली पर उठे सवाल

अकोला : अकोला जिले के बार्शीटाकली तहसील के कातखेड ग्राम पंचायत में मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायतराज अभियान के तहत 18 अक्टूबर को आयोजित की गई ग्रामसभा महज़ “खाली कुर्सियों का तमाशा” बनकर रह गई। इस ग्रामसभा में न तो सरपंच पहुँचे और न ही सचिव — जिससे ग्रामवासियों में तीव्र नाराज़गी का माहौल है।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रविण वाहुरवाघ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने ग्रामपंचायत के सरपंच और सचिव की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की मांग की। परंतु, हैरानी की बात यह है कि इस पूरे प्रकरण पर अब तक जिला परिषद सीईओ की ओर से कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायतराज अभियान के अंतर्गत सभी ग्रामसभाओं का आयोजन कर ग्रामविकास, स्वास्थ्य योजनाओं, निधि उपयोग और बालक कल्याण संबंधी जानकारी ग्रामस्थों तक पहुँचना अनिवार्य है। लेकिन कातखेड ग्राम पंचायत में ग्रामसभा ही आयोजित नहीं की गई — जिससे शासन के आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं।

इस गंभीर लापरवाही के बाद अब जिला परिषद सीईओ की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामविकास की मूलभूत प्रक्रिया में शिथिलता, जवाबदेही का अभाव और सरकारी आदेशों की अनदेखी — ऐसे आरोप अब प्रशासन पर लग रहे हैं।

स्थानीय ग्रामवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कर संबंधित जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य की ग्रामसभाओं में भी यही ढिलाई और भ्रष्टाचार देखने को मिलेगा।

खाली पड़ी ग्रामसभा की कुर्सियों से लेकर जिला प्रशासन की चुप्पी तक — जवाबदेही आखिर किसकी?
यह सवाल अब ग्रामविकास विभाग से लेकर जिला परिषद के गलियारों में गूंज रहा है।

रिपोर्टर : प्रविण वाहुरवाघ

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