मृतकों को जिंदा करने वाले शुक्राचार्य बनेंगे अक्षय खन्ना, ‘महाकाली’ की पहली झलक

अक्षय खन्ना एक बार फिर दर्शकों को चौंकाने की तैयारी में हैं। ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत के किरदार से डर और खौफ का माहौल बनाने के बाद अब अभिनेता ऐसा रूप धारण करने जा रहे हैं, जिसे देखकर उन्हें पहचान पाना भी आसान नहीं होगा। लंबी सफेद दाढ़ी, जटाओं से सजा सिर, माथे पर तिलक और चेहरे पर गहरी गंभीरता अक्षय अब पर्दे पर नजर आएंगे शुक्राचार्य के रूप में।यह किरदार प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स की फिल्म ‘महाकाली’ का हिस्सा है। फिल्म की पहली झलक 24 अगस्त 2026 को सामने आने वाली है और मेकर्स ने इसके साथ जो टैगलाइन साझा की है ‘द एंड बिगिन्स’ उसने कहानी को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है।

महाकाली' में शुक्राचार्य बनेंगे अक्षय खन्ना, 24 अगस्त को होगा बड़ा खुलासा
 
फिल्म में भूमि शेट्टी और रोहित सराफ भी अहम किरदारों में नजर आएंगे। मगर इस समय सबसे ज्यादा चर्चा अक्षय खन्ना के लुक की हो रही है। वजह सिर्फ उनका जबरदस्त मेकओवर नहीं, बल्कि वह किरदार है जिसके पीछे भारतीय पौराणिक कथाओं की एक बेहद दिलचस्प कहानी छिपी है।
 
कौन थे शुक्राचार्य?
 
शुक्राचार्य का नाम आते ही आमतौर पर एक पहचान सामने आती है असुरों के गुरु। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ इतनी नहीं है।पौराणिक ग्रंथों में शुक्राचार्य को अत्यंत विद्वान, तपस्वी और प्रभावशाली आचार्य के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें महर्षि भृगु का पुत्र और ‘उशना’ तथा ‘काव्य’ जैसे नामों से भी जाना जाता है।
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जिस तरह देवताओं के मार्गदर्शक बृहस्पति थे, उसी तरह असुरों को दिशा देने का दायित्व शुक्राचार्य के पास था। यही वजह थी कि देवासुर संघर्ष केवल हथियारों की लड़ाई नहीं रह जाता था। एक तरफ बृहस्पति की नीति और बुद्धि थी, तो दूसरी ओर शुक्राचार्य की रणनीति।
 
एक ऐसी विद्या, जिसने देवताओं की चिंता बढ़ा दी
 
शुक्राचार्य की सबसे चर्चित शक्तियों में मृत संजीवनी विद्या का उल्लेख मिलता है। मान्यता थी कि इस ज्ञान के जरिए मृत व्यक्ति को फिर से जीवन दिया जा सकता था।देवासुर युद्ध में यही क्षमता असुरों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई थी। युद्धभूमि में मारे गए असुरों को शुक्राचार्य दोबारा जीवित कर देते, जिससे उनकी सेना लगातार वापस लौटती रहती।
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देवताओं के लिए इस रहस्य को समझना बेहद जरूरी हो गया। इसी उद्देश्य से देवगुरु बृहस्पति के पुत्र कच को शुक्राचार्य के पास भेजा गया।कच ने उनके आश्रम में शिष्य बनकर सेवा शुरू की। लेकिन असुरों को जब उसकी असली मंशा का पता चला तो उन्होंने उसे रास्ते से हटाने की कोशिश की। कच को बार-बार मारा गया, लेकिन हर बार शुक्राचार्य ने उसे अपनी विद्या से जीवित कर दिया।
 
कथा का सबसे नाटकीय मोड़ तब आया, जब असुरों ने कच को मारकर उसकी राख शराब में मिला दी और वही शराब शुक्राचार्य को पिला दी। इस तरह कच उनके शरीर के भीतर पहुंच गया।अब समस्या यह थी कि कच को बाहर निकालने का मतलब था शुक्राचार्य की मृत्यु।
 
लेकिन शुक्राचार्य ने यहां भी अपने ज्ञान का परिचय दिया। उन्होंने कच को मृत संजीवनी विद्या सिखा दी। कच बाहर निकला और गुरु की मृत्यु हो गई, फिर उसी ज्ञान के जरिए उसने शुक्राचार्य को पुनर्जीवित कर दिया।यह प्रसंग शुक्राचार्य को सिर्फ शक्तिशाली गुरु नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रति समर्पित और अपने शिष्य के भविष्य की चिंता करने वाले आचार्य के रूप में भी सामने लाता है।
 
राजा बलि के गुरु और वामन के सामने खड़ी हुई एक चेतावनी
 
शुक्राचार्य का प्रभाव केवल युद्धों तक सीमित नहीं था। राजा बलि के साथ जुड़ी वामन अवतार की कथा में भी उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।जब भगवान विष्णु वामन के रूप में राजा बलि के सामने पहुंचे और तीन पग भूमि का दान मांगा, तब शुक्राचार्य उनकी असली पहचान समझ गए थे।
 
उन्होंने बलि को रोकने की कोशिश की। उन्हें अंदेशा था कि यह छोटा-सा दिखने वाला ब्राह्मण साधारण याचक नहीं है और इसके पीछे कोई बड़ी लीला छिपी है।लेकिन राजा बलि ने अपना वचन निभाने का फैसला किया।यहां शुक्राचार्य किसी खलनायक की तरह नहीं, बल्कि ऐसे गुरु के रूप में दिखाई देते हैं जो अपने शिष्य को संभावित संकट से बचाने की कोशिश कर रहा है।
 
अब पर्दे पर कितना अलग होगा शुक्राचार्य का रूप?
 
यही सवाल ‘महाकाली’ को दिलचस्प बनाता है।क्या अक्षय खन्ना का शुक्राचार्य सिर्फ रहस्यमयी और भय पैदा करने वाला किरदार होगा? या फिल्म उनके उस पक्ष को भी दिखाएगी, जिसमें वह असाधारण विद्वान, तपस्वी, रणनीतिकार और अपने शिष्यों के प्रति समर्पित गुरु नजर आते हैं?
 
अक्षय खन्ना की स्क्रीन प्रेजेंस और किरदार का यह पौराणिक बैकग्राउंड दोनों मिलकर एक ऐसा कॉम्बिनेशन बनाते हैं, जिसने फिल्म की पहली झलक को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।महाकाली' में असुर गुरू शुक्राचार्य बने अक्षय खन्ना, फर्स्ट लुक में पहचान  मुश्किल - Akshaye khanna mahakali asur guru shukracharya first look tmova -  AajTak
 
24 अगस्त को जब ‘महाकाली’ की पहली झलक सामने आएगी, तब सिर्फ अक्षय खन्ना का नया रूप नहीं खुलेगा। सवाल यह भी होगा कि फिल्म भारतीय पुराणों के इस रहस्यमयी गुरु को किस नजरिए से पेश करती है।क्योंकि शुक्राचार्य की कहानी में सिर्फ देव और असुर नहीं हैं इसमें ज्ञान, शक्ति, नीति, गुरु-धर्म और अपने शिष्यों के लिए आखिरी सीमा तक खड़े रहने की कहानी भी है।

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