बसंत पंचमी का लक्खी मेला - मजार पर नहीं है कोई रौनक
इगलास - नगर में वर्षो से लगते आ रहे मेला बसन्त पंचमी सयैद बाबा की महिमा से जुडा हुआ है और सयैद मजार पर वर्षो से पहली चादर तहसीलदार द्वारा की चढाई जाती रही है लेकिन सयैद बाबा के नाम से मेला लगता है और सयैद मजार पर मेला जैसी कोई रौनक नहीं है जबकि पहले नारी श्रृंगार चूड़ी आदि का बाजार सयैद मजार के इर्द-गिर्द लगता था। बतादें कि गंगा और यमुना दो महातीर्थ स्थलीय नदियों के मध्य स्थित इगलास यूं तो जनपद अलीगढ की प्रमुख तहसीलों में इगलास तहसील चर्चित है किन्तु देश की आजादी से लेकर आज तक मेलाओं के उद्घाटन के लिए तो विधायक, सांसद आदि जनप्रतिनिधि आ जाते है लेकिन मेलाओं के लिए इगलास में कोई स्थाई जगह नहीं है, और बताते है इगलास में बसन्त पंचमी का मेला सयैद बाबा की महिमा से जुडा हुआ है। नगर की सर्वाधिक ऊंचाई वाले स्थान पर स्थित मराठों द्वारा सन् 1850 ई0 में वनवाया गया किला के समीप ही सयैद बाबा की मजार है वर्षो पहले उक्त मराठा किला में तहसील संचालित थी और सयैद मजार से लेकर पूरे बाजार में मेला लगता था तथा मोहल्ला तकिया में झूले आदि लगाये जाते थे। बताते हैं सयैद मजार पर मेला चल रहा था मेले का शोर शरावा सुनते हुये उन दिनों तहसील में तैनात तहसीलदार बुलन्द दख्तर ने मेले को बन्द करा दिया था। जैसे की मेला बन्द कराया कि थोडी देर बाद उन्हे पता चला कि उनका स्वस्थ्य घोडा अचानक मर गया है, उसके थोडी देर बाद ही उन्हे पुनः सूचना मिली कि उनका पुत्र अचानक अस्वस्थ्य हो गया है। यह सुन तहसीलदार के होश फाख्ता हो गये और बहुत चिन्तित होने लगे। रात्रि को सोते समय उन्हे स्वप्न आया कि सयैद बाबा की चार दीवारी कराकर मेले को पुनः शुरू करा दिया जाय तो उनका पुत्र स्वस्थ्य हो जायेगा। सुबह होते ही तहसीलदार ने सयैद मजार की चार दीवारी कराकर मेला लगाये जाने की मुनादी करा दी, जैसे की मेला लगना शुरू हुआ कि तहसीलदार श्री दख्तर का पुत्र स्वस्थ्य हो गया। यह खबर दूर-दूर तक जैसी ही फैलने लगी कि दूर-दराजों से लोग सयैद बाबा पर चादर चढाने व अपनी मुराद मांगने के लिए आने लगे। तभी से मेला बसन्त पंचमी को पहली चादर तहसीलदार द्वारा की चढायी जाती आ रही है। बाबा अब्दुल्लाशाह (सयैद मजार) के गद्दी नसीर मोहम्मद शरीफ ने कहा है कि जिसकी महिमा को लेकर मेला लगाया जाता है उसी की मजार के इर्द-गिर्द कोई रौनक नही है।
रिपोर्टर - इन्द्रजीत प्रेमी

No Previous Comments found.