पर्यटन स्थल ही नहीं बल्कि ब्रज की 84 कोसीय परिक्रमा में धरणीधर सरोवर अहम
इगलास - यमुना और गंगा दो महा तीर्थ स्थलीय नदियों के मध्य बसा कस्वा बेसवां जो आज कल विश्वामित्रपुरी के नाम से भी जाना जाता है वह अपने आपमें पौराणिक यादें सजोए हुए - पर्यटन स्थल ही नहीं बल्कि ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा में अहम माना जा रहा है।
बतादें कि इगलास तहसील में सम्मलित कस्बा एवं नगर पंचायत बेसवां में स्थित धरणीधर सरोवर की साधारण सरोवर नहीं है बल्कि बल्कि महर्षि विश्वामित्र की का हवन कुंड कहा जाता है। बताते हैं त्रेतायुग में जब भगवान राम ने अयोध्या के महाराज दशरथ के यहां ज्येष्ठ पुत्र के रूप में जन्म लिया था। उस समय बेसवां नामक कस्बा के चहुओर बीहड़ जंगल थे। उन दिनों यहां जंगलों में राक्षसों का वास था और धरणीधर नामक सरोवर से थोड़ी दूरी पर ताड़िका वन बताया जाता है। महर्षि विश्वामित्र यहां आये थे और धरणीधर सरोवर उनके द्वारा बनाया गया हवन कुंड कहा जाता है। जब महर्षि विश्वामित्र धरणीधर सरोवर पर हवन करने लगे तो ताड़िका नामक राक्षसी सहित अन्य राक्षसों के आतंक से वह हवन नहीं कर सके तो वह अयोध्या के महाराज दशरथ के पास पहुँचे और उनके ज्येष्ठ पुत्र श्री राम को राक्षसों का नाश करने के लिए यहां लाये, और श्री राम के द्वारा राक्षसी ताड़िका व अन्य राक्षसों का वध करता गया। तभी से बेसवां का नाम विश्वामित्रपुरी कहा जाता है और धरणीधर सरोवर पर दूर दूर के श्रद्धालु स्नान करके अपने आपको पवित्र महसूस करते हैं, तथा दशहरा पर्व पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। तथा 84 कोस की परिक्रमा में भी धरणीधर सरोवर को अहम माना जाता है। इस वर्ष पहली बार धरणीधर सरोवर पर कुम्भ मेले का रूप दिया जा रहा है। जहां लाखों की संख्या में दूर दूर के श्रद्धालु पहुंच रहे हैं ।
रिपोर्टर - इंद्रजीत प्रेमी

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