प्राकृतिक संपदा दीमक (उदी) के प्रकोप से नष्ट हो सकती है, जिम्मेदारों का ध्यान शून्य...
अलीराजपुर - एक रोचक जानकारी है,जिससे हम सब क्षेत्रवासी अनभिज्ञ है, उपरोक्त दर्शाया गया आम का पेड़ दिनांक 27 जनवरी 2026 है, ऐसे अनेको पेड़ है कुछ फलदार जीवित है,कुछ सूखे हैं ठूंठ के रूप में,कुछ अर्ध मरणासन्न स्थिति में है, कुछ अन्य प्रजातियों के भी है। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय अलीराजपुर से दाहोद मार्ग पर स्थित छायादार एवं फलदार वृक्ष जो रोड के दोनों और विद्यमान है इन पेड़ों को हम बरसों से हम देख रहे हैं अधिकतर पेड़ों को रोड के साथ राज दरबार समय के द्वारा लगाया गया है, इनकी संख्या बहुत रही होगी लेकिन वर्तमान में इन्हें गिना जा सकता है। कई पेड़ों पर दीमक के आक्रमण के चिन्ह हमें देखने को मिलते हैं, जो उन्हें सने सने खत्म कर रही है,परंतु पत्रकारिता के स्तंभ से पिछले दो वर्षों में दो बार में विषय प्रस्तुत कर चुका हूं। आज तीसरी बार मुझे पुनः इस विषय को बुद्धिजीवों तक पहुंचाने का प्रयास करना पड़ रहा है, क्योंकि प्रकृति ना किसी को शेयर कर सकती है ना लाइक कर सकती है ना फॉलो कर सकती है ना प्रत्यक्ष लाभ दे सकती है. यह सब पेड़ बेजुबान है,लेकिन जिले के वरिष्ठित्तम अधिकारी, प्रशासनिक अमला, विद्वान मनीशि इसे निहार चुके होंगे क्योंकि इन पेड़ों की संख्या काफी पड़ी है।आप भी ऐसे पेड़ों के पास खड़े हो ध्यान में ले। जिले में प्रमुख सड़कों के किनारे लगे इन वृक्षों की समय रहते सुरक्षा एवं कीटनाशक का प्रयोग कर व अन्य उपाय के द्वारा प्रकोप ग्रस्त पेड़ों को जीवन दान देना अति आवश्यक है,क्योंकि जिले में वन संरक्षित जंगल में विविध पेड़ भी काफी क्षेत्र में मौजूद है जो इन सड़कों से लगा हुआ है। वहीं बागवानी,कृषि,उद्यानिकी तथा खेतों में भी फसली पेड़ो की बढ़ोतरी हुईं है,उन्हें भी प्रभावीत होने से बचा सके।
दीमक उदी का यह प्रकोप कही लह लहाते,प्राणवायु प्रदाता,फलदार,जलाऊ,विविध पेड़ों के विनाश का बड़ा कारण बनता जा रहा है,वरिष्ठ वैज्ञानिकों से इन पेड़ों को बचाने के सुझाव प्राप्त कर,सार्थक पहल करना आवश्यक होगी।
आने वाले समय में हमें ही प्रकृति के प्रति जागरूक रहकर उसका ख्याल रखना होगा।
रिपोर्टर - विजय जैन


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