राजकीय सम्मान के साथ हुआ जज अमन शर्मा का अंतिम संस्कार
दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में रह रहे जज अमन शर्मा ने शनिवार को फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रविवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक शहर अलवर लाया गया। यहाँ तीजकी श्मशान घाट पर गमगीन माहौल में और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पिता एडवोकेट प्रेम कुमार शर्मा ने अपने होनहार बेटे को मुखाग्नि दी, जिसे देख वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
घटना से दो दिन पहले, यानी 1 मई की रात करीब 8 बजे, अमन ने अपने पिता को फोन किया था। उस कॉल में उन्होंने भारी मन से कहा था- "यह मेरा अंतिम कॉल है, अब जीवन जीना संभव नहीं हो रहा है।" बेटे के मुंह से ऐसी बात सुनकर पिता प्रेम प्रकाश उसी रात दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उन्हें क्या पता था कि वे अपने बेटे को बचाने के लिए नहीं, बल्कि उसकी विदाई देखने जा रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि अमन पिछले काफी समय से मानसिक प्रताड़ना (टॉर्चर) झेल रहे थे। बताया जा रहा है कि अमन और उनकी पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। परिजनों के अनुसार: आरोप है कि अमन के सामने उनकी पत्नी ने उनके पिता का अपमान किया, जिसे अमन सहन नहीं कर पाए। परिजनों का कहना है कि अमन की साली (जो जम्मू में IAS हैं) उनकी पत्नी को भड़काती थीं। साली खुद भी अपने पति (दिल्ली पुलिस में सीनियर IPS) से अलग रहती हैं।
पिता जब दिल्ली पहुंचे, तो वे कमरे के बाहर खड़े थे। उन्होंने सुना कि अंदर अमन और उनकी पत्नी के बीच तीखी बहस हो रही थी। पत्नी लगातार चिल्ला रही थीं। इसी दौरान अमन ने बाथरूम से स्टूल निकाला और कमरे में शाल का फंदा बनाकर अपनी जान दे दी। अमन के पिता ने बताया कि वे अपने बेटे की शादी किसी और से करना चाहते थे, लेकिन अमन को अपनी बैचमेट से प्यार था। बेटे की खुशी की खातिर पिता ने इस रिश्ते को स्वीकार किया और पूरे रीति-रिवाजों के साथ शादी करवाई। हालांकि, शादी के बाद अमन की पत्नी का अलवर आना-जाना बहुत कम था। अमन एक शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जिन्होंने कभी अपनी परेशानियों को खुलकर साझा नहीं किया।
अमन की मौत के बाद उनकी पत्नी अपने दोनों बच्चों को लेकर चली गईं। अंतिम संस्कार के वक्त ससुराल पक्ष से कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। अमन के परिजनों का कहना है कि यह केवल आत्महत्या नहीं बल्कि एक अपराध है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। अमन को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले दोषियों को कड़ी सजा मिले।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक शांति किसी भी पद या प्रतिष्ठा से ऊपर है। जब न्याय के आसन पर बैठने वाला व्यक्ति खुद को इतना असहाय महसूस करने लगे, तो समाज को गहराई से आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।

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