शिवभक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी! Amarnath Yatra 2026 की बुकिंग शुरू, जानिए पूरी डिटेल
अगर आपके मन में बाबा बर्फानी के दर्शन की तमन्ना है, तो यह खबर आपके लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है। हिमालय की बर्फीली वादियों में विराजमान भगवान शिव के पवित्र दरबार तक पहुंचने का सपना अब साकार होने वाला है, क्योंकि Amarnath Yatra 2026 की एडवांस बुकिंग 15 अप्रैल से शुरू हो रही है।
कहां है यह पवित्र धाम?
दक्षिण कश्मीर की बर्फीली वादियों में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा हिंदुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। इस पवित्र गुफा में भगवान शिव एक प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि यह दिव्य शिवलिंग चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ अपना आकार बदलता है। गर्मियों में 30 से 40 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।बाबा तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं — पहलगाम रूट जो गुफा से 46 किमी दूर है, और बालटाल रूट जो गुफा से सिर्फ 14 किमी की दूरी पर है।
रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
चूंकि बुकिंग "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर होती है, इसलिए देरी करना भारी पड़ सकता है। यात्रा परमिट ऑनलाइन जारी किए जाएंगे और हर रूट के लिए रोजाना का एक निश्चित कोटा तय किया गया है। आप रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन माध्यम से या देशभर में चुनी गई 554 बैंक शाखाओं में जाकर करवा सकते हैं। बुकिंग के लिए आधार कार्ड से बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य है, साथ ही सभी जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
कौन कर सकता है यात्रा?
यह एक कठिन और दुर्गम ट्रेक है, इसलिए श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने उम्र और फिटनेस से जुड़े कुछ जरूरी नियम तय किए हैं। केवल 13 से 70 साल के बीच के श्रद्धालु ही रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा 6 हफ्ते से अधिक की गर्भवती महिलाओं को इस यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं है।
यात्रा से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान
RFID कार्ड: जम्मू-कश्मीर पहुंचते ही निर्धारित केंद्रों से अपना RFID कार्ड जरूर प्राप्त करें। यह कार्ड पूरी यात्रा के दौरान गले में पहनना अनिवार्य है और बिना इसके यात्रा शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पहचान पत्र और इमरजेंसी पर्ची: अपना आईडी प्रूफ और यात्रा परमिट हमेशा साथ रखें। आपातकाल की स्थिति के लिए एक पर्ची पर किसी साथी यात्री का नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखकर जेब में जरूर रखें।
मौसम की तैयारी: पहाड़ों पर मौसम कभी भी करवट ले सकता है और तापमान अचानक 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे जा सकता है। इसलिए पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट, विंडचीटर, छाता और वाटरप्रूफ जूते साथ ले जाएं। कपड़ों और खाने के सामान को वाटरप्रूफ बैग में पैक करें।
इन गलतियों से बचें — वरना पड़ेगा पछताना
पहाड़ी रास्तों पर चप्पल पहनकर जाना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा अच्छे ट्रेकिंग शूज ही पहनें। रास्ते में किसी भी शॉर्टकट को अपनाने की कोशिश न करें — यह जानलेवा साबित हो सकता है। अधिक ऊंचाई पर तबीयत बिगड़ने के लक्षणों को कभी हल्के में न लें। जहां खतरे के बोर्ड या चेतावनी के नोटिस लगे हों, वहां रुकें नहीं। यात्रा के दौरान शराब, सिगरेट और कैफीन का सेवन सख्त मना है। साथ ही राज्य में पॉलिथीन और प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है — यह एक दंडनीय अपराध है।
बाबा बर्फानी के दर्शन जीवन का एक अनमोल अनुभव है, लेकिन इसके लिए सही तैयारी और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। 15 अप्रैल से बुकिंग शुरू होते ही रजिस्ट्रेशन करवाएं और इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनें। हर हर महादेव!

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