एम्बुलेंस को रास्ता नहीं दिया तो 10 हजार का चालान! जानिए पूरा कानून
क्या आपने कभी सोचा है कि एम्बुलेंस के पीछे बजता हुआ सायरन आखिर इतना जरूरी क्यों होता है? और एम्बुलेंस को रास्ता न देना कितना भारी पड़ सकता है। क्या सिर्फ पुलिस आपको रोक सकती है? क्या सिर्फ चालान कटेगा? या फिर मामला जेल तक भी पहुंच सकता है? जी हां जब सड़क पर अचानक एम्बुलेंस का सायरन सुनाई देता है, तो क्या आप जानते हैं कि उस वक्त सिर्फ एक गाड़ी आपको रास्ता देने के लिए नहीं कह रही होती...बल्कि हो सकता है कि उसके अंदर किसी की जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई चल रही हो! सोचिए...एक तरफ ट्रैफिक में आपकी गाड़ी खड़ी है...दूसरी तरफ पीछे से लगातार एम्बुलेंस का सायरन सुनाई दे रहा है...और उस एम्बुलेंस के अंदर कोई मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने का इंतजार कर रहा है।
ऐसे वक्त में सड़क पर आपकी एक छोटी सी समझदारी किसी की जिंदगी बचाने में मदद कर सकती है। लेकिन अगर कोई चालक एम्बुलेंस को रास्ता देने के बजाय रास्ता रोके रखता है, तो कानून में इसके लिए सख्त प्रावधान है। 1 सितंबर 2019 से लागू हुए नए मोटर व्हीकल एक्ट के आने के बाद से खेल पूरी तरह बदल चुका है। मोटर वाहन अधिनियम, 2019 की धारा 194E के तहत एम्बुलेंस या किसी भी इमरजेंसी गाड़ी का रास्ता रोकने पर सीधे 10,000 रुपये का जुर्माना ठोका जा सकता है।
अगर कोई ड्राइवर बार-बार यह गलती करता पकड़ा गया, तो उसे 6 महीने तक की जेल और ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड होने की सजा मिल सकती है। वहीं अब चालान काटने के लिए पुलिस के डंडे की जरूरत नहीं है; शहरों और हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरे और एम्बुलेंस के डैशबोर्ड कैमरे खुद सबूत रिकॉर्ड करके ऑनलाइन चालान आपके घर भेज रहे हैं। यह नियम सिर्फ बड़ी कारों या चार पहिया वाहनों के लिए नहीं है, बल्कि बाइक और स्कूटर चलाने वालों पर भी पूरी तरह लागू होता है। आपको बता दें सड़क पर दौड़ती एम्बुलेंस सिर्फ लोहे का एक डिब्बा नहीं होती, बल्कि उसके भीतर किसी की सांसें, किसी का भविष्य और किसी परिवार की आखिरी उम्मीदें धड़क रही होती हैं।
कानून की नजर में एम्बुलेंस को 'विशेषाधिकार प्राप्त वाहन' का दर्जा मिला हुआ है। जब भी एम्बुलेंस सायरन या फ्लैश लाइट के साथ सड़क पर निकले, तो हर गाड़ी चालक का यह पहला कर्तव्य है कि वह तुरंत रास्ता खाली करे। तो अब तो आप समझ ही गए होंगे कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही या हीरोपंती आपकी जेब और आपकी इज्जत, दोनों का फलूदा बना सकती है। अगली बार जब भी कान में उस एम्बुलेंस का सायरन गूंजे, तो बिना एक सेकंड गंवाए अपनी गाड़ी साइड में कर लीजिएगा, क्योंकि हो सकता है कि उस गाड़ी में किसी की जान बचाने की आखिरी उम्मीद सफर कर रही हो।
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