अमेरिका में अब्दुल अल-सयद की जीत पर ओवैसी का बयान, बोले- अब यूपी के अब्दुल को मजबूत करनी होगी अपनी सियासी पहचान
अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सयद की जीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोर ली है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम व्यक्ति बनने का इतिहास रच दिया है। उनकी इस जीत पर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी अब्दुल अल-सयद की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़ दिया है।
ओवैसी ने यूपी की सियासत पर दिया संदेश
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर अब्दुल अल-सयद की जीत को मुस्लिम राजनीतिक पहचान से जोड़ते हुए लिखा, "एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी।"ओवैसी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि संघियों ने 'अब्दुल' शब्द को तंज में बदलने की बहुत कोशिश की है। उन्होंने कहा, "वक्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता। अब दरी नहीं बिछाएंगे।"ओवैसी के इस बयान को उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीतिक भागीदारी और समाज में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन हैं अब्दुल अल-सयद?
अब्दुल अल-सयद की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की है। इसके अलावा, रोड्स स्कॉलर के रूप में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है।उनकी शादी सारा जकाकू से हुई है। सारा के माता-पिता भारतीय मूल के हैं। अल-सयद खुद को पूंजीवादी बताते हैं और उनका चुनावी अभियान आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, खासकर बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत पर केंद्रित रहा।
चुनाव अभियान में उठाए ये बड़े मुद्दे
अब्दुल अल-सयद ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कई महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों को प्रमुखता दी। इनमें सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की दिशा में 'मेडिकेयर फॉर ऑल', इजरायल को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता समाप्त करना और चुनावी फंडिंग में सुधार जैसे मुद्दे शामिल थे।उनके चुनाव अभियान में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के पिछले साल के चुनाव प्रचार की झलक भी देखने को मिली। खासतौर पर आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उनका जोर चर्चा में रहा।
सात साल बाद राजनीति में शानदार वापसी
अब्दुल अल-सयद इससे पहले भी अमेरिकी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। साल 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वह इस मुकाबले में 20 फीसदी से अधिक मतों के अंतर से पीछे रह गए थे।इस हार के बाद उन्होंने कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। हालांकि, इस दौरान वह सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए। उन्होंने अपना पॉडकास्ट शुरू किया, एक किताब लिखी और यूट्यूब तथा टेलीविजन के जरिए लगातार अपनी बात लोगों तक पहुंचाते रहे।अब 2026 के चुनाव में जीत के साथ उनकी राजनीतिक वापसी ने उन्हें अमेरिकी राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया है। वहीं, उनकी जीत पर ओवैसी की प्रतिक्रिया ने भारत, खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व और राजनीतिक पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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