ट्रंप का बड़ा हमला! ईरान ने भी किया पलटवार
पश्चिम एशिया का पारा इस वक्त सातवें आसमान पर है! अमेरिका और ईरान के बीच की दुश्मनी अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक ऐसी खौफनाक जंग में बदल चुकी है जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। आसमान मिसाइलों की रोशनी से लाल है, समंदर में बारूद की गंध है और खाड़ी देशों के शहरों में गूंजते सायरन चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि पानी सिर के ऊपर जा चुका है। दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले हॉर्मुज स्ट्रेट में तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले क्या हुए, सुपरपावर अमेरिका का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। फिर क्या था? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे ऑर्डर पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लगातार दूसरी रात ईरान के कलेजे पर, यानी उसके घरेलू ठिकानों पर ताबड़तोड़ और भीषण हवाई हमले शुरू कर दिए। उधर ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। उसने भी कसम खा ली है कि वो अमेरिका की इस गुंडागर्दी का ऐसा इलाज करेगा जिसे इतिहास याद रखेगा। अब सवाल यह है कि क्या यह जंग तीसरे महायुद्ध की शुरुआत है? आइए जानते हैं पल-पल की वो दास्तान, जिसने पूरी दुनिया के शेयर बाजार और तेल के कुओं में आग लगा दी है!
दरअसल, अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए लगातार दूसरी रात ईरान के अंदर करीब 90 सैन्य ठिकानों पर ऐसी बमबारी की कि पूरा इलाका दहल उठा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का साफ कहना है कि ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करके दुनिया की अर्थव्यवस्था से खिलवाड़ किया है, इसलिए उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ना जरूरी हो गया था। आपको बता दें अमेरिकी लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों ने चुन-चुनकर ईरान के इन ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है। जिसमें...
एयर डिफेंस सिस्टम और रडार साइट्स
तटीय निगरानी ठिकाने और नौसैनिक अड्डे
मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन के खूंखार स्टोरेज डिपो
सैन्य लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन
इस वक्त ईरान के कई बड़े और रणनीतिक शहर धमाकों की आवाज से गूंज रहे हैं। बंदर अब्बास में एक के बाद एक आठ बड़े धमाके हुए, जिसके तुरंत बाद वहां के एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव करना पड़ा। इसके अलावा बुशेहर, चाबहार, कोनारक, ईरानशहर, सिरिक, जास्क और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अबू मूसा और क़ेश्म द्वीप पर भी अमेरिकी मिसाइलें कहर बनकर टूटीं। चाबहार के एयरपोर्ट की एक फैसिलिटी पर अमेरिकी बम गिरा, जिसमें आग बुझाने की कोशिश कर रहा कम से कम एक फायरफाइटर जिंदा जल गया और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ईरान के इकलौते समुद्री कमर्शियल हब, चाबहार के फ्री जोन पर ऐसा हमला हुआ कि वहां अफरा-तफरी मच गई। दो बड़े डॉक, समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर और एक बड़ा डिपो तबाह हो गया। हमले के बाद आधी रात को ही गोदामों से 300 से ज्यादा कीमती गाड़ियों को आनन-फानन में बाहर निकाला गया। यही नहीं, यहां का इमाम अली अस्पताल भी इस हमले की चपेट में आ गया और पूरे इलाके की बत्ती गुल हो गई। दूसरी तरफ, उत्तरी गोलिस्तान प्रांत के अककला में अमेरिकी क्रूज मिसाइल ने 'आक टेका खान रेलवे ब्रिज' को सीधे निशाने पर लेकर उड़ा दिया। हालांकि, राहत की बात ये रही कि बुशेहर के परमाणु बिजली संयंत्र के पास धमाके तो हुए, लेकिन न्यूक्लियर प्लांट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
वहीं तनाव तब और बढ़ गया जब यह हमला ऐसे समय हुआ जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का हाल ही में निधन हुआ है। उनके शव को इराक के नजफ से ईरान के मशहद लाया जा रहा है, जहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। पूरा देश शोक में डूबा है, ताबूतों पर बदले का प्रतीक लाल कपड़ा चढ़ाया जा रहा है और लाखों की भीड़ सड़कों पर है। ऐसे भावुक और भड़कते माहौल के बीच जब अमेरिका ने बम बरसाए, तो ईरान का खून खौल उठा। IRGC ने सीधा आरोप लगाया कि अमेरिका ने पूर्वी ईरान के दो अहम पुलों को इसलिए उड़ाया ताकि खामेनेई साहब के अंतिम विदाई समारोह को रोका जा सके। ईरान ने दहाड़ते हुए कहा- "अमेरिका के राष्ट्रपति के इरादों को हम मिट्टी में मिला देंगे और हमारी इस्लामिक क्रांति आखिरी जीत तक लड़ेगी!" फिर क्या था, ईरान ने बिना वक्त गंवाए अपनी नेवी और एयरोस्पेस फोर्स को खुली छूट दे दी। इसके बाद ईरान ने सजा देने वाली जवाबी कार्रवाई के पहले चरण का ऐलान करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस पर सैकड़ों घातक ड्रोन्स और मिसाइलों से धावा बोल दिया! ईरान का दावा है कि उसने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सेना के एयरबेस को टारगेट किया और वहां के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को तहस-नहस कर दिया। कतर में अमेरिका के शुरुआती चेतावनी देने वाले सैटेलाइट एंटीना को निशाना बनाया। इस भीषण जवाबी हमले के बाद कुवैत और बहरीन में इमरजेंसी अलार्म और एयर रेड सायरन बजने लगे। कतर ने तो अपने नागरिकों के लिए हाई अलर्ट जारी कर कह दिया था कि घरों के अंदर रहें और कांच की खिड़कियों से दूर रहें!
इस बीच पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गरजते हुए कहा कि अगर ईरान ने हमारे हितों या हॉर्मुज स्ट्रेट में किसी भी जहाज को छुआ, तो अमेरिका उसकी औकात 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करके दिखाएगा! वहीं दूसरी तरफ ईरान ने करारा जवाब देते हुए कहा कि "हमला करोगे तो ऐसा करारा जवाब मिलेगा कि भूल नहीं पाओगे। धमकियां देने और वादे तोड़ने की कीमत अब अमेरिका को चुकानी पड़ेगी।"
आपको बता दें कि इस युद्ध की आग सिर्फ मिडिल ईस्ट तक नहीं है, इसकी तपिश सीधे आपकी और हमारी जेब तक पहुंच रही है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वो रास्ता है जहां से पूरी दुनिया के कुल तेल का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। इस लड़ाई की वजह से हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद होने की कगार पर है। ईरान के हमलों के डर से कम से कम चार बड़े तेल और गैस टैंकर बीच रास्ते से ही यू-टर्न ले चुके हैं। कतर एनर्जी के नियंत्रण वाले तीन विशाल LNG टैंकर रास्ता बदलकर पीछे हट गए हैं। वहीं, कुवैत से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा भारतीय झंडे वाला महाकाय टैंकर 'लीला वादिनार' भी ओमान के तट से वापस लौट गया है। जहाजों की आवाजाही का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि पिछले साल जहां इस रास्ते से रोज 104 से 115 जहाज गुजरते थे, वो संख्या घटकर अब सिर्फ 6 से 12 रह गई है! इस भयंकर तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अचानक 78 सेंट बढ़कर 78.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 1.01 फीसदी की छलांग लगाकर 74.26 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अगर ये जंग लंबी खिंची, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे और महंगाई का बम फूटना तय है।
लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब दोनों देशों के बीच 18 जून को एक समझौता हुआ था, तो 60 दिनों के इस सीजफायर के बीच अचानक यह नौबत क्यों आई? असल में इसके पीछे गहरी कूटनीति और चालबाजियां हैं। समझौते के मुताबिक हॉर्मुज स्ट्रेट का मैनेजमेंट ईरान और ओमान को मिलकर करना है। ओमान इस रास्ते पर कोई टैक्स लगाने के खिलाफ है, जबकि ईरान अपना पूरा हक चाहता है। वहीं अमेरिका चाहता है कि इन 60 दिनों में उसके जहाज बिना ईरान को बताए वहां से गुजरें, लेकिन ईरान का साफ कहना है कि बिना उसकी मर्जी के यहां एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। बस इसी बात पर ठन गई और 25 जून को ईरान ने अमेरिकी जहाजों को रोका और फिर से बमबारी का खूनी सिलसिला शुरू हो गया।
कुल मिलाकर कहानी यह है कि पश्चिम एशिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां सिर्फ एक छोटी सी चिंगारी पूरे विश्व को तबाह कर सकती है। अमेरिका अपनी सुपरपावर की हनक छोड़ने को तैयार नहीं है और ईरान अपने आत्मसम्मान के लिए आर-पार की लड़ाई का मन बना चुका है। हॉर्मुज स्ट्रेट का यह विवाद अब सिर्फ दो देशों की जंग नहीं रहा, बल्कि यह दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल की सप्लाई और करोड़ों मासूमों की जिंदगी का सवाल बन चुका है। ऐसे में सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का 20 गुना ताकत वाला फॉर्मूला काम करेगा या फिर ईरान का करारा थप्पड़ अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर देगा? क्या खाड़ी देश इस युद्ध की आग में पूरी तरह झुलस जाएंगे या फिर कोई बीच का रास्ता निकलेगा? हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं और आसमान से बरसते गोलों के बीच शांति की उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं।
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