An Autobiography: मोतीलाल नेहरू क्यों मानते थे कामयाब लोगों का काम नहीं है राजनीति, अंग्रेजी तौर-तरीकों के थे कद्रदान

पंडित जवाहरलाल नेहरू 17 साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे और 1912 में राजनीतिक जीवन में आए। 1930-35 के दौरान नमक आंदोलन और अन्य राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग लेने के कारण उन्हें नौ बार जेल जाना पड़ा। जेल में रहते हुए उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘एन ऑटोबायोग्राफी’ लिखी, जिसका हाल ही में हिंदी रूपांतरण ‘मेरी कहानी’ पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित किया गया है।

biography of motilal nehru indian lawyer and politician - Prabhasakshi  latest news in hindi

इस पुस्तक में नेहरू ने अपने पिता मोतीलाल नेहरू के जीवन, शिक्षा और वकालत के अनुभवों को विस्तार से बताया। वे लिखते हैं कि मोतीलाल नेहरू ने छोटी उम्र में फारसी और अरबी की पढ़ाई की, बाद में अंग्रेजी शिक्षा शुरू हुई। पढ़ाई के दौरान वे खेल-कूद और शरारत के लिए प्रसिद्ध थे और कॉलेज में तेज-मिजाज और स्वतंत्र विचारधारा वाले छात्र माने जाते थे।

Motilal Nehru Birthday Anniversary became lawyer with the help of brother  early life struggle - भाई की मदद से वकील बन सके थे मोतीलाल नेहरू - News18  हिंदी

नेहरू बताते हैं कि उनके पिता बीए की परीक्षा पूरी तैयारी के बिना ही छोड़ गए और वकालत के काम में इतने व्यस्त थे कि उनके पास राजनीतिक गतिविधियों के लिए बहुत समय नहीं था। हालांकि वे राष्ट्रवादी थे और कांग्रेस की बैठकों में जाते थे, फिर भी उनका मुख्य फोकस पेशेवर जीवन पर ही रहता था।

इस तरह, नेहरू की आत्मकथा न केवल उनके जीवन और विचारों का दस्तावेज है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और उनके परिवार के अनुभवों का भी अद्भुत परिचय देती है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.