AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल का MLA चैतर वसावा पर आए फैसले पर बयान

आनंद - डेडियापाड़ा चैतर वसावा पर कोर्ट के फैसले पर रिएक्शन देते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि चैतर वसावा को आज कोर्ट ने सात साल जेल की सज़ा सुनाई है। चैतर वसावा गुजरात के आदिवासी समुदाय के बड़े नेता हैं और बहुत पॉपुलर हैं। वे समय-समय पर आदिवासी समुदाय के लिए संघर्ष करते रहे हैं और आदिवासी समुदाय के मुद्दों पर आवाज़ उठाते रहे हैं। वे आम आदमी पार्टी के MLA हैं। इससे पहले भी वे आदिवासी समुदाय के भले के लिए कई बार तीन, चार महीने के लिए जेल जा चुके हैं। कहा जाता है कि आदिवासी समुदाय के लिए जो पैसा आता है, उसे आदिवासियों पर खर्च करने के बजाय कुछ लोग गलत इस्तेमाल करते हैं। चैतर वसावा ने इसके खिलाफ कई बार आवाज़ उठाई है और आदिवासियों के हक की रक्षा करने की कोशिश की है। उन्होंने आदिवासियों से ज़मीन छीने जाने के मुद्दे पर भी आवाज़ उठाई है। उन्होंने MGNREGA में बहुत ज़्यादा करप्शन होने का आरोप लगाकर इसके खिलाफ़ लड़ाई भी लड़ी है। उन्होंने आदिवासी समुदाय के लिए लगातार संघर्ष किया है। कहा जाता है कि उनकी बढ़ती पॉपुलैरिटी और उनके काम की वजह से विरोधी पार्टी उन्हें कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। इसलिए पिछले कुछ महीनों में साज़िश करके उनके खिलाफ़ झूठा केस बनाया गया और आज उन्हें सात साल जेल की सज़ा सुनाई गई है।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि ED पार्टी जानती थी कि जब तक चैतर वसावा इस इलाके में हैं, वे यहां से अपना MLA नहीं जिता सकते। इसीलिए उन्होंने चैतर वसावा को MLA पद से हटाने और सात साल की सज़ा दिलाने की साज़िश रची। लेकिन आज मैं ED पार्टी को बताना चाहता हूं कि इस मुद्दे पर गुजरात के लोगों में बहुत गुस्सा है और लोग इसका जवाब देंगे। कुछ महीने पहले गुजरात में पंचायत चुनाव हुए थे। नर्मदा ज़िला पंचायत पूरी तरह से आम आदमी पार्टी ने भारी बहुमत से जीती थी। ज़िला परिषद में भी ज़्यादातर सदस्य आम आदमी पार्टी के थे। एक दिन नर्मदा ज़िले में नरेंद्र मोदी की एक मीटिंग थी, जिसमें करीब पाँच हज़ार लोग आए थे। थोड़ी दूर पर चैतर वसावा की एक मीटिंग थी, जिसमें पच्चीस हज़ार लोग आए थे। नरेंद्र मोदी की मीटिंग में पूरा एडमिनिस्ट्रेशन लगा था, बसें भी लगाई गई थीं, फिर भी सिर्फ़ पाँच हज़ार लोग आए। जबकि चैतर वसावा की मीटिंग में कोई बस या एडमिनिस्ट्रेशन नहीं था, फिर भी लोग खुद चलकर पच्चीस हज़ार की संख्या में आए। इससे चैतर वसावा की पॉपुलैरिटी का अंदाज़ा लगता है। उसी दिन मुझे लगा कि चैतर वसावा आसानी से रिहा नहीं होंगे। लेकिन मैं ED पार्टी को चेतावनी देना चाहता हूँ कि डेमोक्रेसी में ऐसा प्रेशर और बुलीइंग काम नहीं करती। यहाँ सिर्फ़ जनता की चलती है। आप चैतर वसावा पर जितना प्रेशर डालने की कोशिश करेंगे, वह उतने ही बड़े लीडर बनकर उभरेंगे। आने वाले समय में हम देखेंगे कि गुजरात की जनता इस तरह की पॉलिटिक्स का क्या जवाब देती है।

रिपोर्टर - ताहिर मेमन

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