समाज से हिंसा और नफ़रत को खत्म करने के लिए पढ़ाई करना सबसे बड़ा हथियार है: इंद्रेश कुमार
आनंद : भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाले नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (NCMEI) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. शाहिद अख्तर की खास मौजूदगी में, आनंद जिले के नापा में आदर्श एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स में 'एकता, सांस्कृतिक विविधता और एक विकसित भारत बनाने में माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की भूमिका@2047' विषय पर एक सिंपोजियम का आयोजन किया गया। इस सिंपोजियम में, प्रोफेसर शाहिद अख्तर ने कहा कि देश भर के 68.4 प्रतिशत छात्र माइनॉरिटी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि 31.6% छात्र दूसरी जातियों से भी पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हममें इंसानियत होनी चाहिए, एक अच्छा इंसान बनना ही ज़िंदगी की पूंजी है, खासकर उन्होंने यह भी कहा कि हमें दूसरे धर्मों की बुराई नहीं करनी चाहिए, चाहे हम किसी भी धर्म के हों। मिस्टर शाहिद अख्तर ने आगे कहा कि आज के समय में समाज को कट्टरता और नफरत से बचाकर प्यार और भाईचारे की ओर मोड़ने की बहुत ज़रूरत है। सिर्फ़ 'तालीम' (फॉर्मल एजुकेशन) ही इंसान को रास्ता दिखाती है, लेकिन सिर्फ़ सच्चा 'इलम' (ज्ञान और संस्कृति) ही इंसान को सच्चा इंसान बनाता है। अगर शिक्षा के साथ इंसानियत नहीं है, तो इंसान शैतानियत की ओर धकेला जाता है। उन्होंने स्टूडेंट्स से 'कलाम' के रास्ते पर चलने और देश के आदर्शों जैसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, सर सैयद अहमद खान और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का उदाहरण देते हुए देश की तरक्की में योगदान देने की अपील की।
प्रोफेसर डॉ. शाहिद अख्तर ने सेमिनार के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत की असली खूबसूरती इसकी अनेकता में एकता में है। हमारे देश की पहचान इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प और सपने को साकार करने के लिए आज नई पीढ़ी और स्टूडेंट्स को गाइड करना ज़रूरी है। सेमिनार में इस बारे में डिटेल में चर्चा हुई कि आने वाले कल का भारत कैसा होगा, उसमें एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन और स्टूडेंट्स का क्या योगदान हो सकता है। श्री अख्तर ने माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन से अपील की कि वे न सिर्फ कल्चरल डाइवर्सिटी का जश्न मनाएं, बल्कि बच्चों को इसके वैल्यू भी सिखाएं। कोशिश होनी चाहिए कि देश के सभी त्योहार स्कूल और कॉलेजों में मिलजुलकर मनाए जाएं और दूसरे समुदायों के साथ भी सद्भावना बढ़े। उन्होंने आगे कहा कि यह सरदार वल्लभभाई पटेल और पूज्य महात्मा गांधी की पवित्र धरती है। हमें डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसी महान हस्तियों को अपना रोल मॉडल मानना होगा। देश के युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर या IAS बनकर कलाम साहब के दिखाए देश सेवा के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारी पहली और सबसे बड़ी पहचान 'इंडियन' (हिंदुस्तानी) के तौर पर है। जाति, पंथ या धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर और एकजुट होकर ही हम इस महान देश को विकसित भारत के शिखर पर ले जा सकते हैं। उन्होंने स्टूडेंट्स से पॉजिटिव सोच रखने की अपील की। उन्होंने उनसे हायर स्टडीज़ करने की भी अपील की, और कहा कि एजुकेशन ही ज़िंदगी में आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने आगे कहा कि माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के लिए भी एक डेवलप्ड इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए अपना सपोर्ट देना उतना ही ज़रूरी है। इस प्रोग्राम में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सीनियर लीडर श्री इंद्रेश कुमार ने देश में भाईचारा, राष्ट्रवाद और क्वालिटी एजुकेशन फैलाने का अपना पक्का इरादा जताया। उन्होंने कहा कि हम पहले भी एक नेशन (राष्ट्र) थे, आज भी एक हैं और आगे भी एक रहेंगे। उन्होंने एकता की इसी भावना को असली 'खुदाई भवन' बताया। उन्होंने ज़ोर दिया कि आज के प्रोग्राम का मेन मकसद देश के युवाओं को तालीम और इल्म के ज़रिए एक बेहतर भारतीय नागरिक बनाना है, ताकि वे खुद भी आगे बढ़ सकें और देश को भी डेवलपमेंट के रास्ते पर आगे ले जा सकें। एजुकेशन समाज से हिंसा और नफ़रत को खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार है।
रिपोर्टर : ताहिर मेमन
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