डेडियापाड़ा KVK में नेचुरल खेती की ट्रेनिंग शुरू, 40 किसान सीखेंगे मॉडर्न नेचुरल खेती
आनंद : नेचुरल खेती को बढ़ावा देने के लिए नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया गया है। यह ट्रेनिंग एक्सटेंशन एजुकेशन इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर ऑर्गनाइज़ की गई है। प्रोग्राम में कुल 40 ट्रेनीज़ ने जोश के साथ हिस्सा लिया और नेचुरल खेती के मॉडर्न तरीकों पर गाइडेंस ली। इस ट्रेनिंग का मुख्य मकसद किसानों को केमिकल खेती के विकल्प के तौर पर नेचुरल खेती की तरफ बढ़ावा देना है, ताकि खेती की लागत कम हो और लंबे समय तक मिट्टी की क्वालिटी बनी रहे। नेचुरल खेती के अलग-अलग मुद्दों पर गाइडेंस ट्रेनिंग के दौरान, एक्सपर्ट्स ने नेचुरल खेती के बेसिक प्रिंसिपल्स, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, नेचुरल पेस्ट कंट्रोल, मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ाने के उपाय और कम लागत में ज़्यादा प्रोडक्शन पाने के तरीकों पर डिटेल में जानकारी दी। किसानों के लिए प्रैक्टिकल गाइडेंस के साथ एक सवाल-जवाब का सेशन भी रखा गया, ताकि वे इन तरीकों को आसानी से अपने खेतों में अपना सकें। यह ट्रेनिंग किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। एक्सटेंशन एजुकेशन इंस्टीट्यूट आणंद और KVK डेडियापाड़ा के मिलकर किए गए इस ट्रेनिंग से किसानों को नई टेक्निकल और साइंटिफिक अप्रोच के साथ नेचुरल खेती की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में एग्रीकल्चर सेक्टर में पॉजिटिव बदलाव लाने में ऐसी ट्रेनिंग अहम भूमिका निभाएंगी।
एनवायरनमेंट और एग्रीकल्चर दोनों के लिए फायदेमंद पहल
नेचुरल खेती से न सिर्फ खेती का खर्च कम होता है, बल्कि जमीन की यील्ड पोटेंशियल भी बनी रहती है, पानी का सही इस्तेमाल होता है और एनवायरनमेंट को होने वाला नुकसान भी कम होता है। इसलिए, पिछले कुछ सालों में किसानों में इस तरीके में दिलचस्पी बढ़ी है। डेडियापाड़ा KVK में शुरू हुई यह ट्रेनिंग किसानों को मॉडर्न और सस्टेनेबल एग्रीकल्चरल तरीके अपनाने में मदद करेगी। अगर ऐसे प्रोग्राम लगातार होते रहे तो नर्मदा जिले के किसान और तेजी से नेचुरल खेती की ओर बढ़ पाएंगे और उनकी इनकम भी बढ़ने की संभावना है। गुजरात सरकार और अलग-अलग एग्रीकल्चरल ऑर्गनाइजेशन पिछले कुछ सालों से नेचुरल खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। किसानों को ट्रेनिंग, गाइडेंस और प्रैक्टिकल जानकारी मिलने से, वे कम लागत पर ज़्यादा सस्टेनेबल खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
रिपोर्टर : साबिर मेमन
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