लोकसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, ध्वनि मत से बिल पास
देश के करोड़ों छात्रों से जुड़ा सबसे अहम विधेयक अब लोकसभा से पास हो चुका है। लेकिन इस कानून पर चर्चा जितनी परीक्षा व्यवस्था को लेकर हुई, उससे कहीं ज्यादा हंगामा राहुल गांधी के बयान पर देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, तीखी नोकझोंक हुई और आखिरकार भारी शोर-शराबे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। देखिए संसद से हमारी ये खास रिपोर्ट।
लोकसभा में मंगलवार को लंबे और तीखे राजनीतिक विवाद के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें असंसदीय बताया। इस मुद्दे पर कई बार सदन में व्यवधान पैदा हुआ।
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में लगा रहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा न केवल असंसदीय थी बल्कि संसदीय परंपराओं के भी विपरीत थी।
जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि देश के युवाओं के संदर्भ में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संसद जैसे लोकतांत्रिक मंच पर मर्यादित भाषा का प्रयोग होना चाहिए और जनप्रतिनिधियों से यही अपेक्षा की जाती है।
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब के दौरान 21 जुलाई की एक घटना का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुई घटना विपक्ष की राजनीतिक हताशा को दर्शाती है और इस प्रकार का व्यवहार नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था और गोली चलाने जैसा कोई आदेश नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार मंत्री के पास नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।
सरकार का दावा है कि नया संशोधन कानून परीक्षा माफिया, पेपर लीक और संगठित परीक्षा धांधली पर पहले से अधिक प्रभावी और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है।
लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित होने के बाद अब निगाहें इसके अगले संसदीय चरण और भविष्य में इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर हैं। सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष अब भी इसे पर्याप्त नहीं मान रहा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नया कानून वास्तव में पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाएगा और देश के करोड़ों छात्रों का टूटा भरोसा वापस दिला पाएगा, या फिर यह बहस आगे भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जारी रहेगी।
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