काफी खास मानी जाती है अपरा एकादशी? जानें महत्‍व और चमत्कार

अपरा एकादशी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और फलदायक व्रत माना जाता है। इसे ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है और इसका विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, पुण्य की प्राप्ति और मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।

अपरा एकादशी का महत्व क्यों है खास?

पापों से मुक्ति:

स्कंद पुराण और पद्म पुराण में उल्लेख है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को पूर्व जन्म और इस जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है।

मोक्ष की प्राप्ति:

कहा जाता है कि अपरा एकादशी व्रत करने वाले को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद पुनर्जन्म नहीं होता।

तीर्थस्नान के बराबर पुण्य:

इस एकादशी का व्रत गंगा स्नान, काशी यात्रा, पुत्रदा एकादशी और अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य देने वाला बताया गया है।

राज्य, कीर्ति और वैभव की प्राप्ति:

यह व्रत करने से व्यक्ति के आर्थिक संकट दूर होते हैं, और जीवन में सफलता व सम्मान मिलता है। राजा-महाराजाओं ने भी इसे रखा था ताकि उनके राज्य में समृद्धि बनी रहे।

सद्बुद्धि और शुद्ध मन:

व्रत रखने से व्यक्ति का मन संयमित होता है, और उसमें सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

अपरा एकादशी पर क्या करें?

एक दिन पहले से सात्विक भोजन लें।

एकादशी के दिन उपवास रखें – निर्जला या फलाहार।

भगवान विष्णु का पूजन करें – तुलसी, पीले फूल, दीपक और धूप अर्पित करें।

विष्णु सहस्त्रनाम, गीता पाठ या विष्णु चालीसा पढ़ें।

जरूरतमंदों को दान करें – अन्न, वस्त्र, या दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

कब आती है अपरा एकादशी?

यह व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आता है, जो आमतौर पर मई-जून के बीच होता है। हर साल इसकी तिथि बदलती है, इसलिए पंचांग देखकर ही व्रत करें।

अगर आप पापों से मुक्ति, आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना करते हैं, तो अपरा एकादशी का व्रत करना अत्यंत फलदायक रहेगा।

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