गठिया के शुरुआती लक्षणों को किया नजरअंदाज, तो जोड़ों को हो सकता है बड़ा नुकसान

सुबह बिस्तर से उठते ही घुटनों में दर्द होना, हाथों की उंगलियों में अकड़न महसूस होना या सीढ़ियां चढ़ते वक्त परेशानी होना। अक्सर लोग इन दिक्कतों को बढ़ती उम्र का असर समझकर टाल देते हैं। लेकिन यही लक्षण गठिया की शुरुआत भी हो सकते हैं। समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो चलना-फिरना और रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करना भी मुश्किल हो सकता है। खास बात यह है कि गठिया सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं, युवाओं को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
 
गठिया आखिर है क्या?
 
गठिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई ऐसी बीमारियों का समूह है, जो जोड़ों को प्रभावित करती हैं। इसके दो प्रमुख प्रकार ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटॉइड आर्थराइटिस हैं।
 
Arthritis: Causes, Symptoms, and Treatment | SPARSH Hospital
 
ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों की बनावट धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। यह समस्या खासकर घुटनों, कूल्हों और हाथों के जोड़ों में देखने को मिलती है। वहीं, रूमेटॉइड आर्थराइटिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही गलती से जोड़ों पर हमला करने लगती है। इससे सूजन, दर्द और समय के साथ जोड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
 
इन लक्षणों को हल्के में न लें
 
जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, सुबह उठने पर अकड़न और सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर जोड़ों में बार-बार दर्द हो रहा है या अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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गठिया की समय पर पहचान होने से बीमारी के प्रकार के मुताबिक इलाज शुरू किया जा सकता है। खासकर रूमेटॉइड आर्थराइटिस में जल्द इलाज शुरू करना जरूरी है, क्योंकि इससे जोड़ों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
 
जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
 
नियमित व्यायाम करें: दर्द के डर से शारीरिक गतिविधियां पूरी तरह बंद कर देना सही नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, तैराकी और साइकिल चलाना फायदेमंद हो सकता है। जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी मदद करते हैं। हालांकि, तेज दर्द होने पर जबरदस्ती एक्सरसाइज न करें।
 
वजन पर रखें नजर: शरीर का वजन ज्यादा होने से घुटनों और कूल्हों पर दबाव बढ़ता है। इससे दर्द और चलने-फिरने की परेशानी बढ़ सकती है। संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए वजन को नियंत्रित रखना जोड़ों के लिए फायदेमंद है।
 
दर्द को उम्र का असर समझकर न टालें: अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहती है, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लें। सही जांच और इलाज से जोड़ों की सेहत बनाए रखने और रोजमर्रा के काम आसानी से करने में मदद मिल सकती है।
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गठिया को लेकर सबसे बड़ी गलती यही है कि लोग शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। याद रखें, समय पर पहचान और सही देखभाल जोड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है।

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