केजरीवाल का 'ममता बनर्जी' स्टाइल: खुद हाईकोर्ट पहुंचे पूर्व सीएम

दिल्ली की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और कानूनी गलियारों को दहला देने वाली खबर! क्या दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिली राहत अब आफत में बदलने वाली है? निचली अदालत से तो 'क्लीन चिट' मिल गई थी, लेकिन CBI ने उस फैसले के परखच्चे उड़ाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आज की सुनवाई सिर्फ दलीलों की नहीं थी, बल्कि यह न्यायपालिका के विश्वास और 'बेंच' की निष्पक्षता की जंग बन गई। केजरीवाल खुद कोर्ट में मौजूद हैं, माहौल तनावपूर्ण है और सवाल ये है कि क्या जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट में आज कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? आइए देखते हैं हाईकोर्ट से आई इस सीधी रिपोर्ट में!

दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब सीबीआई की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। आपको बता दें कि निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को इस मामले में दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया था, जिसे CBI ने 'कानून की बड़ी भूल' बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सीबीआई का साफ कहना है कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं और निचली अदालत के फैसले को पलटा जाना चाहिए।

आज की सबसे बड़ी हाईलाइट रही अरविंद केजरीवाल की व्यक्तिगत मौजूदगी। जैसे फरवरी में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर दलीलें दी थीं, आज केजरीवाल भी उसी अंदाज में हाईकोर्ट पहुंचे। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच बदलने की अर्जी लगा दी। AAP लगातार जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाती रही है। केजरीवाल की मांग है कि यह मामला किसी दूसरी बेंच में ट्रांसफर किया जाए। केजरीवाल की इस अर्जी पर CBI की ओर से देश के दिग्गज वकील और सॉलिसिटर जनरल (SG) ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कोर्ट में तीखे तेवर दिखाते हुए कहा:

"बेंच बदलने की मांग सिर्फ केस को लटकाने और न्यायिक संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जजों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।"

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था। एक तरफ CBI के वकील दलीलों के पुलिंदे खोल रहे थे, तो दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल अपने वकीलों के साथ खुद मोर्चा संभाले हुए थे। केजरीवाल की ओर से यह दलील दी जा रही है कि उन्हें इस बेंच से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है, जबकि सॉलिसिटर जनरल इसे कोर्ट का अपमान बता रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट का यह कमरा आज राजनीति और कानून के टकराव का गवाह बना। एक तरफ CBI की ज़िद है कि केजरीवाल को सजा मिले, तो दूसरी तरफ केजरीवाल का अविश्वास है कि उन्हें इस बेंच से न्याय नहीं मिलेगा। क्या जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा खुद को इस केस से अलग करेंगी? या फिर केजरीवाल की अर्जी खारिज कर CBI की दलीलों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी? दिल्ली की शराब नीति का यह जिन्न अभी बोतल से बाहर ही है और इसकी आंच अब सीधे हाईकोर्ट की चौखट तक पहुँच गई है।

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