लेजेंडरी सिंगर Asha Bhosle ने 92 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा!
आज संगीत की दुनिया से एक ऐसी खबर आई है जिसने करोड़ों दिलों को तोड़ दिया है। अपनी खनकती आवाज और बेमिसाल वर्सटैलिटी से सात दशकों तक राज करने वाली 'आशा ताई' यानी आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली। आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया उस आवाज को याद कर रही है जिसने शास्त्रीय गजल से लेकर रॉक-एन-रोल तक, हर सुर को अपना बना लिया था।
आशा जी ने 40 के दशक में अपना सफर शुरू किया था। एक ऐसे दौर में जब उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का दबदबा था, आशा जी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। 1952 की फिल्म 'संगदिल' और 1953 की 'परिणीता' ने उनके हुनर की पहली झलक दिखाई। लेकिन असली कामयाबी मिली 1957 में फिल्म 'नया दौर' से, जहाँ ओ.पी. नय्यर के संगीत और मोहम्मद रफी के साथ उनकी जुगलबंदी ने 'उड़ें जब जब जुल्फें तेरी' जैसे गानों से इतिहास रच दिया।
आशा भोसले सिर्फ एक गायिका नहीं, एक निडर कलाकार थीं। 'तीसरी मंजिल' के गाने 'आजा आजा' के लिए उन्होंने 10 दिन रिहर्सल की क्योंकि उन्हें लगा था कि वो वेस्टर्न बीट पर नहीं गा पाएंगी। इसके बाद 'पिया तू अब तो आजा' और 'ये मेरा दिल' जैसे गानों ने उन्हें बॉलीवुड की 'कैबरे क्वीन' बना दिया। 1981 में फिल्म 'उमराव जान' के जरिए उन्होंने साबित किया कि वो गजल की बारीकियों में भी माहिर हैं। खय्याम साहब के निर्देशन में 'दिल चीज क्या है' के लिए उन्हें अपना पहला नेशनल अवॉर्ड मिला। 62 साल की उम्र में उन्होंने 'रंगीला' के लिए 'तन्हा तन्हा' गाया, जो आज भी उतना ही फ्रेश लगता है।
20 भाषाओं में गाने गाकर अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने वाली आशा जी ने 79 साल की उम्र में फिल्म 'माई' से एक्टिंग में भी लोहा मनवाया। अल्जाइमर मरीज के उनके किरदार को क्रिटिक्स ने खूब सराहा। अभी जनवरी 2025 की ही तो बात है, जब दुबई कॉन्सर्ट में 91 साल की 'आशा ताई' ने विक्की कौशल के गाने 'तौबा तौबा' पर परफॉर्म कर सबको हैरान कर दिया था। उनकी वो एनर्जी, वो मुस्कुराहट और स्टेज पर थिरकते कदम आज भी फैंस की आंखों में बसे हैं।
कहते हैं कि कलाकार कभी मरता नहीं, वह अपनी कला के जरिए हमेशा जीवित रहता है। आज भले ही आशा ताई हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन जब भी कहीं 'दम मारो दम' बजेगा या कहीं 'इन आंखों की मस्ती' का जिक्र होगा, आशा जी की रूहानी आवाज हमें उनकी मौजूदगी का अहसास कराएगी। सुरों की इस जादूगरनी को हमारा भावपूर्ण नमन।


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