संसद के 'मानव लंगूर' की कहानी वायरल! बंदर भगाने की नौकरी में कितनी मिलती है सैलरी?
सोशल मीडिया पर इन दिनों संसद भवन से जुड़ा एक अनोखा वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शख्स लंगूर जैसी आवाज निकालकर संसद परिसर में घूम रहे बंदरों को भगाता नजर आ रहा है। यह शख्स कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि दिल्ली में कई वर्षों से "मानव लंगूर" के तौर पर काम कर रहे असलम खान हैं। उनकी अनोखी नौकरी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
वीडियो वायरल होने के बाद असलम खान चर्चा में आ गए हैं। कई लोगों के लिए यह काम भले ही अजीब लग रहा हो, लेकिन दिल्ली में सरकारी इमारतों और महत्वपूर्ण स्थानों पर बंदरों को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती रही है।
पहले सरकारी भवनों में बंदरों को भगाने के लिए असली लंगूरों का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब वन्यजीव नियमों और सुरक्षा कारणों से इंसानों को यह जिम्मेदारी दी जाती है। ये कर्मचारी लंगूर जैसी आवाज निकालकर बंदरों को डराते हैं और उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए वहां से दूर भगाते हैं। संसद भवन में भी असलम खान समेत कई लोग इस काम में तैनात हैं। उनका काम सुबह से शाम तक परिसर में निगरानी रखना और जहां भी बंदर नजर आएं, वहां आवाज निकालकर उन्हें भगाना होता है।
वायरल वीडियो में नजर आने वाले असलम खान पिछले कई वर्षों से यह काम कर रहे हैं। उनके पास करीब 15 से 20 साल का अनुभव बताया जाता है। इससे पहले वह दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में भी बंदर भगाने का काम कर चुके हैं।
दिल्ली के कई सरकारी भवनों में ऐसे कर्मचारियों को तैनात किया जाता है, जो अपनी खास आवाज और तकनीक से बंदरों को नियंत्रित करते हैं।
इस काम के लिए सरकार सीधे कोई भर्ती परीक्षा या वैकेंसी जारी नहीं करती। सरकारी विभाग इसके लिए टेंडर जारी करते हैं। टेंडर लेने वाली निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं और उन्हें संबंधित जगहों पर तैनात करती हैं। दिल्ली विधानसभा में भी इस तरह की सेवा के लिए टेंडर जारी किया गया था। टेंडर के तहत कुछ कर्मचारियों को बंदर भगाने की जिम्मेदारी दी जाती है।
इस नौकरी की आधिकारिक सैलरी सार्वजनिक रूप से तय नहीं होती, क्योंकि भुगतान टेंडर और कंपनी के अनुबंध के आधार पर किया जाता है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम में कर्मचारियों को करीब 20 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन मिल सकता है। आमतौर पर इन कर्मचारियों की ड्यूटी करीब 8 घंटे की होती है। सरकारी भवनों में बंदरों की संख्या और जरूरत के हिसाब से कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इस नौकरी में सिर्फ लंगूर जैसी आवाज निकालना ही काफी नहीं होता, बल्कि बंदरों को नियंत्रित करना भी जरूरी होता है। अगर कोई कर्मचारी बंदर भगाने में सफल नहीं रहता या लगातार लापरवाही करता है, तो कंपनी उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसके अलावा बिना वजह ड्यूटी से गायब रहने पर जुर्माने का भी प्रावधान हो सकता है।
दिल्ली के कई इलाकों में बंदरों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सरकारी दफ्तरों, अदालतों और बड़े भवनों में बंदरों की मौजूदगी कर्मचारियों और आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। ऐसे में "मानव लंगूर" जैसी सेवाएं बिना किसी नुकसान के इस समस्या को नियंत्रित करने का एक तरीका बन गई हैं।
फिलहाल असलम खान का वीडियो वायरल होने के बाद एक बार फिर इस अनोखे प्रोफेशन की चर्चा शुरू हो गई है। यह नौकरी भले ही आम लोगों को अलग और दिलचस्प लगे, लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहर में यह कई सरकारी संस्थानों की जरूरत बन चुकी है।
No Previous Comments found.