असम में भारी मतदान, हिमंत का 'जादू' चलेगा या गोगोई मारेंगे बाजी?
आज असम की धरती ने वो कर दिखाया है, जिसकी गूंज दिल्ली के गलियारों तक सुनाई दे रही है! जी हां असम की 126 विधानसभा सीटों पर आज लोकतंत्र का वो महापर्व मनाया गया, जिसने इतिहास के पिछले कई रिकॉर्ड्स को खतरे में डाल दिया है। क्या बूढ़े, क्या जवान और क्या महिलाएं, आज हर हाथ में स्याही का वो निशान था, जो असम के अगले 5 साल की किस्मत लिखने वाला है।
सुबह के कोहरे से लेकर दोपहर की तपती धूप और खराब मौसम की चुनौतियों के बीच, असम के जांबाज़ मतदाताओं का पोलिंग बूथों पर जो सैलाब उमड़ा, उसने साफ कर दिया है कि जनता का मूड क्या है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की साख दांव पर है, तो गौरव गोगोई की अगुवाई में कांग्रेस ने भी वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है।
आपको बता दें असम विधानसभा की सभी 126 सीटों पर आज का दिन किसी युद्ध से कम नहीं था। सुबह 7 बजे जब मतदान केंद्रों के दरवाजे खुले, तब से लेकर शाम तक मतदाताओं का जोश देखते ही बना। 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर आज सिर्फ वोट नहीं पड़े, बल्कि एक नए असम के संकल्प पर मुहर लगी है। शुरुआत भले ही मध्यम स्तर की रही हो, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, मतदान का प्रतिशत रॉकेट की रफ्तार से ऊपर गया। सुबह के शुरुआती घंटों में जहाँ 18% के आसपास मतदान था, वहीं 11 बजे तक यह आंकड़ा 38.92% को पार कर गया था।
शाम होते-होते राज्य के कई हिस्सों में भारी मतदान की खबरें आईं। बोंगाईगांव और अभयापुरी जैसे इलाकों में वोटरों ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। शिवसागर में तो मतदाताओं की कतारें इतनी लंबी थीं कि चुनाव आयोग को भी उनकी सराहना करनी पड़ी। वहीं ऊपरी असम के डेमोव और नाज़िरा में भी जमकर वोट बरसे।
वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मतदान से पहले कामाख्या देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट के पोलिंग बूथ पर अपनी मां के साथ पहुंचे। कुल मिलाकर इस बार मुकाबला बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प रहा। असम ने आज घर से निकलकर यह बता दिया है कि वह अपने हक और अपने भविष्य के लिए कितना जागरूक है।
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