बीजेपी ने जारी किया ‘संकल्प पत्र’, 5 लाख करोड़ निवेश और 2 लाख नौकरियों का वादा

गुवाहाटी की धरती से आज दिल्ली तक गूँज उठी है! असम विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना वो ब्रह्मास्त्र निकाल लिया है, जिसे उन्होंने 'संकल्प पत्र' का नाम दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में जारी यह घोषणापत्र सिर्फ वादों का पुलिंदा नहीं, बल्कि असम को देश का सबसे चमकीला राज्य बनाने का एक ब्लूप्रिंट नजर आ रहा है। 5 लाख करोड़ का निवेश, जमीन जिहाद पर प्रहार और घर-घर तक पहुँचने वाली अरुणोदय की नई शक्ति...बीजेपी ने इस बार चुनावी बिसात पर ऐसी चालें चली हैं कि विरोधियों के पसीने छूटने तय हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या बीजेपी का यह सुरक्षित और विकसित असम का नारा 4 मई को जीत का तिलक लगाएगा? आइए जानते हैं इस संकल्प पत्र की एक-एक बड़ी बात।

आपको बता दें भारतीय जनता पार्टी ने आज मंगलवार को गुवाहाटी में 2026 के असम विधानसभा चुनाव के लिए अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और सर्बानंद सोनोवाल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, राज्य BKP अध्यक्ष दिलीप सैकिया और अन्य लोग मौजूद थे। इस दौरान CM सरमा ने राज्य में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड और दो लाख नौकरियों का वादा किया। अपने घोषणापत्र में पार्टी ने विकास, जन कल्याण, युवाओं के लिए रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और असमिया पहचान व मूल निवासियों की सुरक्षा से जुड़े अपने प्रमुख वादों का जिक्र किया है। इस बार के घोषणापत्र में किए वादे किए गए हैं, जैसे....

अगले पांच साल में 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का संकल्प लिया गया है। 

साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी’ के फार्मूले पर काम होगा।

घोषणापत्र में भूमि, विरासत और मूल असमिया लोगों की गरिमा की रक्षा का वादा किया गया है।

भूमि जिहाद के खतरे से निपटने के लिए कड़े कदम उठाएंगे।

असम को भारत के पूर्वी प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने के लिए 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।

मूल निवासियों की जमीन, विरासत के लिए पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा 

UCC लागू करना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना शामिल हैं। 

वहीं इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि हकीकत पेश करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि जो काम कांग्रेस 60 साल में नहीं कर पाई, वो बीजेपी ने 10 साल में कर दिखाया है।
असम की जीएसडीपी 2015-16 में जहाँ महज 2.24 लाख करोड़ रुपये थी, वह आज 2025-26 में बढ़कर 7.41 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 4 सालों में प्रति व्यक्ति आय में 54 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। 2020-21 में जो आय 1.03 लाख रुपये थी, वह 2024-25 में बढ़कर 1.59 लाख रुपये हो गई है। 

दरअसल, बीजेपी ने वादा किया है कि सत्ता में वापसी पर प्रदेश में 5 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। ब्रह्मपुत्र पर पुलों का जाल बिछाने की बात हो या आधुनिक इकोसिस्टम की, बीजेपी असमिया प्रतिभाओं को दुनिया से वापस अपने घर बुलाने की तैयारी में है। वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणापत्र के जरिए यह साफ कर दिया कि उनकी सरकार 'सॉफ्ट' रुख नहीं अपनाएगी। 

आपको बता दें उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम में भी UCC लागू करने का संकल्प लिया गया है। हालांकि, इसमें आदिवासियों और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को पूरी तरह बाहर रखा गया है ताकि उनकी विशिष्ट संस्कृति सुरक्षित रहे। बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए वादा किया है कि बांग्लादेशी 'मियाओं' द्वारा कब्जाई गई जमीनें वापस ली जाएंगी और मूल निवासियों की जमीन व गरिमा की रक्षा की जाएगी। साथ ही राज्य में लव जिहाद के खिलाफ सख्त से सख्त कानून और कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है। इतना ही नहीं असम के लिए बाढ़ एक अभिशाप रही है, जिसे खत्म करने के लिए बीजेपी ने मास्टरप्लान तैयार किया है। इसके लिए सरकार बनते ही शुरुआती दो वर्षों में बाढ़ मुक्त असम की दिशा में 18 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही 'अरुणोदय' योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली राशि 1250 रुपये से सीधे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दी जाएगी। इसके अलावा, 40 लाख महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने के लक्ष्य के साथ 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने अपने घोषणापत्र में युवाओं का भी खास ध्यान रखा है। अगले पांच साल में 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का संकल्प लिया गया है। साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज, वन यूनिवर्सिटी’ के फार्मूले पर काम होगा।

जाहिर है असम की सभी 126 सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में महा-मुकाबला होगा। 7 अप्रैल को प्रचार का शोर थम जाएगा और 4 मई को ईवीएम से असम का भविष्य बाहर आएगा। बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया और सर्बानंद सोनोवाल ने इसे 'जनता का संकल्प पत्र' बताते हुए जीत का पूरा भरोसा जताया है। एक तरफ 'सुरक्षित असम' की बात है, तो दूसरी तरफ आधुनिक और 'ग्लोबल' असम का सपना। अब गेंद असम की जनता के पाले में है कि क्या वो 4 मई को बीजेपी के इस 'संकल्प' पर अपनी मुहर लगाएगी या विपक्ष का 'हाथ' कोई नया चमत्कार करेगा? फिलहाल नजरें 9 अप्रैल की वोटिंग पर टिकी हैं! 

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