असम चुनाव 2026: पीएम मोदी का चाय बागान दौरा बना विपक्ष के लिए चुनौती

असम की वादियों में आज सुबह एक ऐसी तस्वीर उभरी जिसने न सिर्फ राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि हर असम वासियों के दिल को जीत लिया। चुनाव में अब महज 7 दिन का वक्त बचा है और माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल रात 9 बजे डिब्रूगढ़ की धरती पर कदम रखते हैं और सुबह होते ही सीधे पहुँच जाते हैं उन चाय के बागानों में, जो असम की धड़कन हैं। हाथ में टोकरी, चेहरे पर मुस्कान और साथ में चाय की पत्तियां तोड़तीं उन जांबाज महिलाओं के साथ पीएम मोदी का यह 'चाय बागान कनेक्ट' विपक्षी खेमे में खलबली मचाने के लिए काफी है!

आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिब्रूगढ़ दौरा महज एक चुनावी दौरा नहीं, बल्कि भावनाओं का सैलाब नजर आया। बुधवार की सुनहरी सुबह जब सूरज की किरणें चाय की हरी पत्तियों पर पड़ रही थीं, तब पीएम मोदी इन बागानों के बीच टहलते नजर आए। उन्होंने न सिर्फ वहां काम करने वाली महिलाओं से मुलाकात की, बल्कि खुद भी चाय की पत्तियां चुनकर यह संदेश दिया कि वे उनकी मेहनत और संस्कृति के कितने करीब हैं। प्रधानमंत्री ने अपनी इस यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा करते हुए बेहद भावुक संदेश लिखा। उन्होंने कहा...

"चाय असम की आत्मा है! यहां की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। आज सुबह डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में जाना और वहां की कर्मठ महिलाओं से बात करना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।" 

वहीं बागान में काम करने वाली महिलाएं अपने बीच देश के प्रधानसेवक को पाकर गदगद थीं। काम के बीच में ही हंसी-ठिठोली का दौर चला। महिलाओं ने पीएम मोदी को अपनी गौरवशाली संस्कृति और परंपराओं के बारे में बताया। जब काम खत्म हुआ, तो महिलाओं ने एक खास गुजारिश की कि "मोदी जी, एक सेल्फी!" प्रधानमंत्री ने भी बड़े चाव से उनके साथ सेल्फी खिंचवाई और मुस्कुराते हुए पोज़ दिया। पीएम ने लिखा कि इन महिलाओं की मेहनत और लगन ही है जिसने असम के गौरव को सात समंदर पार तक पहुँचाया है। आपको बता दें असम में 9 अप्रैल को वोटिंग होनी है और 4 मई को यह तय होगा कि असम की गद्दी पर कौन बैठेगा। वर्तमान में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी सरकार है, जिनके सामने अपनी सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती है। तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटी है। ऐसे में चाय बागान का यह दौरा बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। असम की राजनीति में 'चाय बागान श्रमिक' एक बहुत बड़ा वोट बैंक हैं, और पीएम मोदी ने सीधे उनके दिल में जगह बनाकर विरोधियों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है।

ऐसे में डिब्रूगढ़ की इन तस्वीरों ने साफ कर दिया है कि बीजेपी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। एक तरफ विकास का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री का यह सादगी भरा अंदाज, जो सीधे आम जनता से जुड़ता है। चाय की उन पत्तियों के बीच पीएम मोदी की यह सेल्फी सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि असम के लाखों चाय श्रमिकों के प्रति एक बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक संदेश है। अब देखना यह होगा कि 9 अप्रैल को जब जनता ईवीएम का बटन दबाएगी, तो क्या प्रधानमंत्री की यह 'चाय वाली कूटनीति' हिमंता बिस्वा सरमा की राह आसान कर पाएगी? नतीजों के लिए 4 मई का इंतजार रहेगा, लेकिन फिलहाल तो असम की हवाओं में चाय की खुशबू के साथ चुनावी पारा सातवें आसमान पर है! 

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