बायोफ्यूल प्लांट लगाने की शुरू हुई थी कवायद
भदोही - सत्तर के दशक में औराई में चीनी मिल लगायी गई थी। करीब 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में फैले इस मिल में उस समय 1260 क्विंटल गन्ने की पेराई होती थी। एक हजार बोरा चीनी उत्पादन होता था। 1991-92 में सर्वाधिक चीनी उत्पादन करने पर इस मिल को पुरस्कार भी मिला। बाद में समय बीतने के साथ परिस्थितियां भी बदलती गईं। वर्ष 2009 में मिल को बंद कर दिया गया। उसके बाद तमाम प्रयास हुए लेकिन मिल से पेराई नहीं चालू हो सकी। अब तो इसी परिसर में अस्थाई गोशाला भी खुल गया है। कई सामान इसमें से अन्य मिलों में जा चुके हैं। यहां बलिया, जौनपुर, मिर्जापुर आदि स्थानों से किसान गन्ना पेराई के लिए आते थे।अब गन्ना के किसान कम हैं। जो हैं भी वह अपने काम भर के लिए ही खेती करते हैं।
बायोफ्यूल प्लांट लगाने की शुरू हुई थी कवायद
बंद पड़े चीनी मिल को चालू करने के लिए वादे तो खूब हुए, जब सूबे के मुख्यमंत्री योगीआदित्य नाथ यहां आए तो उन्होंने मिल चालू होने की संभावनाओं को नकार दिया। साथ ही यहां बायोफ्यूल प्लांट लगाने की संभावना जताई थी। उसके बाद ही कवायद शुरू हुई। अधिकारियों ने निरीक्षण करके प्रस्ताव भी बनाया और जिले स्तर से शासन स्तर को भेज दिया गया। प्रस्ताव गए करीब छह माह से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। बायोफ्यूल प्लांट लगेगा तो रोजगार भी बढ़ेगा। बंद पड़ी औराई चीनी मिल में बायोफ्यूल प्लांट लगाने को लेकर जिले स्तर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन स्तर से ही नीतिगत फैसला लिया जाना है। वहां से जो निर्देश प्राप्त होगा उसी के अनुसार आगे कार्य किया जाएगा।
रिपोर्टर - विजय शंकर दूबे
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