लोन चुकाने के बाद भी रिकवरी नोटिस !
औरंगाबाद - लोन की पूरी राशि चुकाने और बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बावजूद रिकवरी नोटिस भेजे जाने का मामला सामने आया है। कुटुंबा प्रखंड के कझपा गांव निवासी रामपुकार सिंह ने इंडियन बैंक की सिंघपुर-अंबा शाखा के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए औरंगाबाद के पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पीड़ित रामपुकार सिंह के अनुसार, उनके पुत्र राजीव कुमार सिंह ने इंडियन बैंक (पूर्व इलाहाबाद बैंक) की सिंघपुर-अंबा शाखा से लोन लिया था। बाद में बैंक के साथ वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के तहत निर्धारित राशि का भुगतान कर लोन का निपटारा कर दिया गया। उनका दावा है कि भुगतान के बाद बैंक की ओर से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट भी जारी किया गया था।
रामपुकार सिंह का आरोप है कि लोन के निपटारे के बावजूद बैंक की ओर से उनके पुत्र के नाम राष्ट्रीय लोक अदालत में लोन संबंधी मामले के निष्पादन के लिए रिकवरी नोटिस भेज दिया गया। पीड़ित के मुताबिक, नोटिस में करीब 2 लाख 86 हजार 774 रुपये की राशि की मांग की गई थी। उन्होंने शाखा प्रबंधक ऋषिकेश कुमार और सहायक प्रबंधक अमन कुमार पर साजिश के तहत अवैध वसूली का प्रयास करने का आरोप लगाया है। पीड़ित का यह भी आरोप है कि जब नोटिस के माध्यम से राशि वसूली का प्रयास सफल नहीं हुआ तो उनके परिवार और गांव-समाज में यह बात कही गई कि उनके पुत्र पर छह लाख रुपये से अधिक का लोन बकाया है। रामपुकार सिंह का कहना है कि इस तरह की बातों से उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले को लेकर जब वे बैंक पहुंचे तो, उनके आरोप के अनुसार, शुरुआत में शाखा प्रबंधक का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा। हालांकि, काफी बातचीत के बाद बैंक के दस्तावेजों की जांच की गई। रामपुकार सिंह का दावा है कि जांच के बाद बैंक प्रबंधन ने लोन के भुगतान को सही माना और कहा कि संभवत: गलती से नोटिस जारी हो गया होगा।
एक और व्यक्ति को नोटिस भेजे जाने का दावा
रामपुकार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके गांव के अरविंद सिंह को भी लोन चुकाने के बावजूद इसी तरह की नोटिस भेजी गई है। उनका दावा है कि ऐसे मामलों में बैंक के क्षेत्रीय रिकवरी एजेंट की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पीड़ित ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय लोक अदालत के नाम पर भेजी गई नोटिस संदिग्ध है और इसे लोक अदालत के प्राधिकार से जारी किए जाने के बजाय बैंक स्तर से तैयार कर भेजा गया। उन्होंने नोटिस की वैधता और उसके जारी होने की प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
रामपुकार सिंह ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित बैंक अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि अपने परिवार को कथित रूप से हुई परेशानी और मानसिक प्रताड़ना से न्याय दिलाना है। साथ ही उन्होंने मांग की कि यदि बैंक स्तर पर कोई गंभीर लापरवाही या गलत प्रक्रिया सामने आती है तो भविष्य में अन्य ऋणधारकों के साथ ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, मामला पुलिस शिकायत तक पहुंच चुका है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोन वास्तव में पूरी तरह निपट चुका था या नहीं, रिकवरी नोटिस किस आधार पर जारी हुई और इसमें किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ अथवा नहीं। पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों पर बैंक अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
रिपोर्टर - रमाकांत सिंह

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