स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, आरोपों की हुई पुष्टी...
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज पॉक्सो प्रकरण सोशल और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। एडीजे पॉक्सो कोर्ट के निर्देश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बटुकों से जुड़े यौन शोषण के आरोपों में पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने 25 फरवरी 2026 के आसपास अपने बयान में कहा था कि उनके पास ऐसे पुख्ता साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पीड़ित बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट से जांच को नया आधार
हाल ही में सामने आई मेडिकल रिपोर्ट ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में बटुकों के साथ जबरन यौन कृत्य किए जाने की पुष्टि की गई है। यह रिपोर्ट अब जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है। पीड़ित बटुकों ने मीडिया से बातचीत में आरोप दोहराए कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदनंद प्रकाश उपाध्याय और अन्य ने उन्हें गुरु दीक्षा के नाम पर प्रताड़ित किया और अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें अन्य लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाता और उसके बाद कथित आपत्तिजनक कृत्य किए जाते थे।
20 अन्य बटुक अब भी फंसे हुए
बटुकों ने आरोप लगाया कि राजस्थान और बिहार से भी बच्चों को मठ में लाया जाता था। लगभग 20 अन्य बटुक भी कथित उत्पीड़न के शिकार हुए हैं, लेकिन डर और दबाव के कारण सामने नहीं आ पा रहे। उन्होंने कहा कि मठ परिसर में कई बाहरी लोग आते-जाते रहते थे, जिनमें कथित प्रभावशाली और सफेदपोश व्यक्ति शामिल थे, हालांकि उन्होंने किसी का नाम सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं किया। बटुकों का कहना है कि माघ मेले के दौरान विवाद बढ़ने पर वे मठ छोड़कर दूसरे धार्मिक नेता के पास पहुंचे और पूरी बात बताई। उनके अनुसार, उन्हें अब भी धमकियां मिल रही हैं।
जांच और आरोपी का बयान
इस मामले में पहले ही प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और प्रकरण न्यायालय के विचाराधीन है। इसके साथ ही, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में कहा कि जिस प्रकरण की जांच हो रही है, उसमें शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की पुलिस के साथ मौजूदगी जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती है।


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