एनएम ने विभागीय प्रताड़ना से तंग आकर खाया ज़हर, सुसाइड नोट में फार्मासिस्ट पर गंभीर आरोप।

रूदौली : अयोध्या जनपद रूदौली क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुजागंज में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तैनात एएनएम  द्वारा कथित विभागीय प्रताड़ना से तंग आकर ज़हर खाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता एएनएम अनीता ने ज़हर खाने से पहले सुसाइड नोट लिखकर स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल फिलहाल उक्त सुसाइड वायरल पत्र का सी न्यूज़ भारत पुष्टि नहीं करता जानकारी के अनुसार उन्हें रूदौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है पीड़िता द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट के अनुसार, विभागीय अधिकारियों द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाकर अलग-अलग स्थानों पर टीकाकरण ड्यूटी लगाई जा रही थी। एएनएम अनीता ने लिखा है। कि उनसे एक साथ पांच-पांच जगहों पर ड्यूटी कराई जा रही थी, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई थीं।सुसाइड नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि रूदौली सीएचसी में तैनात आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट धनीराम द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाता था। ड्यूटी पर जाने का दबाव बनाया जाता था और किसी कारणवश ड्यूटी न कर पाने पर उनसे पैसों की मांग की जाती थी। पीड़िता का आरोप है कि कई बार उन्होंने मजबूरी में पैसे भी दिए।शुक्रवार देर रात लगभग 11 बजे एएनएम अनीता ने सुसाइड नोट लिखने के बाद ज़हर खा लिया। ज़हर खाने के बाद उनके पति प्रवेश कुमार को एसएससी ग्रुप के माध्यम से फोन कर इसकी जानकारी मिली। जब तक परिजन मौके पर पहुंचे, तब तक वह ज़हर खा चुकी थीं। आनन-फानन में उन्हें एंबुलेंस के जरिए रूदौली सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।बताया गया कि ज़हर खाने से पहले एएनएम अनीता ने रूदौली सीएचसी के व्हाट्सएप ग्रुप पर भी संदेश भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा कि वह ज़हर खाने जा रही हैं और उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिससे वह और अधिक तनाव में थीं। इस घटना ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुजागंज की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 10 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में केवल एक ही एएनएम तैनात है। ऐसे में यदि इमरजेंसी डिलीवरी का मामला आता है तो गर्भवती महिलाओं को मजबूरन निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी एएनएम को फोन किया जाता है, तो जवाब मिलता है कि वह टीकाकरण ड्यूटी पर बाहर गई हुई हैं।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम को वहां नियमित सेवाओं के लिए रखा जाता है या उन्हें लगातार क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर टीकाकरण ड्यूटी में भेजना उचित है। इससे न केवल कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, बल्कि ग्रामीण जनता की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।गौरतलब है कि करीब एक साल पहले भी शुजागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक फार्मासिस्ट ने रात के समय फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और कर्मचारियों की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। अब स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी और स्वास्थ्यकर्मी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

रिपोर्टर : आई बी सिंह

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