दिल्ली में ट्रक ड्राइवर पति लापता, पत्नी ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार

अयोध्या: दिल्ली में ट्रक ड्राइवर पति लापता, पत्नी ने एसएसपी से लगाई न्याय की गुहार

अयोध्या- उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला ने अपने लापता पति की तलाश और कानूनी कार्यवाही के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है। ग्राम बरौली की निवासी प्रार्थिनी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में ट्रक चलाने गए उनके पति पिछले कई दिनों से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हैं और संबंधित ट्रांसपोर्टर इस मामले में संदिग्ध व्यवहार कर रहा है।

रोजगार की तलाश में गए थे दिल्ली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना खण्डासा अंतर्गत ग्राम बरौली निवासी मनोज कुमार पुत्र द्वारिका प्रसाद, बीते 18 मार्च 2026 को रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली गए थे। वहां वे लोहा मंडी स्थित ट्रांसपोर्टर अमर बहादुर सिंह के पास ट्रक चालक के रूप में काम कर रहे थे। मनोज के परिजनों के अनुसार, वे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए वहां कड़ी मेहनत कर रहे थे।

रहस्यमयी तरीके से बंद हुआ संपर्क
प्रार्थिनी ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि 21 और 22 अप्रैल 2026 की मध्य रात्रि तक उनकी अपने पति मनोज से मोबाइल पर बातचीत हुई थी। हालांकि, उस रात के बाद से ही मनोज  लगातार बंद आ रहा है। कई दिनों तक संपर्क न हो पाने के कारण परिवार में चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है।

ट्रांसपोर्टर और मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल
पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने ट्रांसपोर्टर अमर बहादुर सिंह से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। शिकायत के अनुसार, ट्रांसपोर्टर मामले को टालने का प्रयास कर रहा है और बार-बार फोन काट देता है। इसके अतिरिक्त, बरौली गांव के ही प्रदीप कुमार, जिन्होंने मनोज की नौकरी लगवाई थी, उन्होंने भी इस विषय में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया है। 

पुलिस से कार्यवाही की मांग
अपने पति की सुरक्षा को लेकर आशंकित महिला ने एसएसपी अयोध्या से गुहार लगाई है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। प्रार्थना पत्र में एफआईआर दर्ज करने और आवश्यक कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए मनोज कुमार की खोजबीन करने की मांग की गई है। प्रार्थिनी ने प्रार्थना पत्र के साथ अपने पति की पहचान हेतु उनकी फोटो भी संलग्न की है।

इस मामले ने एक बार फिर महानगरों में काम करने वाले प्रवासी कामगारों की सुरक्षा और उनके नियोक्ताओं की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्यवाही करता है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

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