गाय सिर्फ दूध नहीं, ‘चलता-फिरता कारखाना’ है

अयोध्या : जहां लोग गौशाला को ‘खर्च’ समझते हैं, वहीं 700-800 गाय वाली गौशाला हर साल 50 लाख से 1 करोड़ तक कमा सकती है। बस गोबर-मूत्र को कचरा नहीं, ‘कच्चा माल’ समझना होगा।
 
1 गौशाला = कितना उत्पादन? 800 गाय का हिसाब:
1. गोबर: 1 गाय रोज 10 किलो = 800 गाय × 10 किलो = 8 टन रोज। 
   - वर्मी कंपोस्ट: 8 टन गोबर से रोज 3 टन खाद। बाजार भाव 8 रु/किलो = 24,000 रु रोज = 72 लाख सालाना।
   - गोबर गैस प्लांट: 8 टन गोबर से 1600 यूनिट बिजली + 2 टन स्लरी खाद रोज। सालाना बिजली बचत 15 लाख रु।
2. गोमूत्र: 1 गाय रोज 5 लीटर = 4000 लीटर रोज।
   - जीवामृत/अर्क: 10 रु/लीटर भी बिके तो 40,000 रु रोज = 1.2 करोड़ सालाना। किसान हाथों-हाथ लेता है।
3. अन्य उत्पाद: गोकाष्ठ, दीये, धूपबत्ती, फिनाइल, साबुन से 10-15 लाख अलग।
 
गौशाला को कुल लाभ: 1.5 से 2 करोड़ सालाना 
खर्च: चारा-दवाई-लेबर करीब 80 लाख-1 करोड़। शुद्ध मुनाफा: 50 लाख से 1 करोड़।
 
हलियापुर गौशाला के लिए रास्ता:
 
सरकार दे रही मदद: 
1. UP गो सेवा आयोग: बायोगैस प्लांट पर 50% सब्सिडी।
2. मनरेगा: गौशाला में टैंक, शेड बनाने के लिए लेबर-मटेरियल फ्री।
3. राष्ट्रीय गोकुल मिशन: देशी नस्ल संरक्षण पर 5 लाख तक अनुदान।
 
निचोड़: 800 गाय का गोबर अगर नाली में बहाया तो बदबू और बीमारी। उसी गोबर से खाद-बिजली बना दी तो गौशाला आत्मनिर्भर और गांव के लिए वरदान। 
 
गांव प्रधान चाहें तो गौशाला अगले 6 महीने में ‘जीरो वेस्ट मॉडल’ बन सकती है। बस इच्छाशक्ति चाहिए। 
 
रिपोर्टर : आईबी सिंह

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