ग्राम प्रधान के 7 घपले, जनता करे पर्दाफाश
अयोध्या : गांव के विकास में सबसे ज्यादा घोटाला नाली, खड़ंजा, शौचालय, कॉलोनी के नाम पर होता है। प्रधान के 7 कॉमन फंडे समझिए, जागरूक रहिए:
1. नाली निर्माण का खेल: कागज पर 500 मीटर, जमीन पर 200 मीटर। बाकी रकम जेब में। नाली बनते ही टूट जाए तो मतलब सीमेंट कम, कमीशन ज्यादा।
2. खड़ंजा घोटाला: पुराने ईंट को उखाड़ कर दोबारा लगा देना। बिल नया, ईंट वही। मोटाई 6 इंच की जगह 3 इंच।
3. शौचालय सिर्फ फोटो में*: लाभार्थी के नाम पर पैसा निकाल लिया, शौचालय बना ही नहीं। या घटिया शीट-ईंट से बना दिया, 6 महीने में ढह गया।
4. सफाई के नाम पर हवा: हर महीने सफाईकर्मी की सैलरी निकली, गांव में झाड़ू लगी ही नहीं। नाली सिल्ट से जाम, मच्छर से बीमारी।
5. कॉलोनी का बंदरबांट*: अपात्र को आवास, पात्र दर-दर भटके। एक ही मकान 3 बार दिखाकर पैसा निकाला।
6. फर्जी मस्टररोल: मृत लोगों, शहर में रहने वालों के नाम से मजदूरी निकाली। JCB से काम कराकर 100 मजदूर दिखा दिए।
7. एस्टीमेट में ओवररेटिंग*: 1 लाख का काम 3 लाख में पास। JE-सेक्रेटरी-प्रधान की मिलीभगत से 60% कमीशन पहले तय।
जनता क्या करे? 3 हथियार:
1. eGramSwaraj App: अपने गांव का बजट, काम, पेमेंट ऑनलाइन चेक करें।
2. सोशल ऑडिट: काम शुरू हो तो खुद फोटो-वीडियो बनाएं। मटेरियल की क्वालिटी देखें।
3. RTI डालें: मस्टररोल, बिल-वाउचर, जियो-टैग फोटो मांगें। 30 दिन में जवाब न मिले तो शिकायत।
याद रखें: प्रधान का नहीं, जनता का पैसा है। जागो, हिसाब मांगो। जहां सवाल होगा, वहां घोटाला बंद होगा।
रिपोर्टर : इंद्र बहादुर सिंह
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