महंत दिनेंद्र दास जी उर्फ (बौरा) बाबा महराज संत निर्मोही अखाड़ा शक्ती के प्रतीक
अयोध्या - दान विवाद के बीच निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास जी की दो टूक SIT ने पूंछा तक नहीं,पद की लालसा कभी नहीं रही। अयोध्या राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी के बीच निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास जी महाराज ने बड़ा बयान दिया है। कहा कि एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट तो सौंप दी, लेकिन उनसे आज तक पूंछताछ तक नहीं हुई। दशकों का संघर्ष: निर्मोही अखाड़ा बरसों सुप्रीम कोर्ट समेत हर अदालत में राम मंदिर का पक्ष रखता रहा है। सुल्तानपुर जनपद के हलियापुर गांव निवासी प्रभात सिंह अखाड़े की तरफ से पावर ऑफ अटॉर्नी थे और टीवी डिबेट में भी पक्ष रखते थे। हाशिए पर ट्रस्टी,महंत दिनेंद्र दास जी खुद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं, पर संघ परिवार की विचारधारा से न जुड़े होने के कारण शुरू से किनारे कर दिए गए।
पूरी व्यवस्था संघ-विहिप से जुड़े चंपतराय,गोपाल राव और बाहरी व्यक्ति राम शंकर यादव 'टिन्नू' जैसे लोगों के हाथ में रही।संत का भाव: महंत जी बोले- मैं सरल संत हूँ,पद की लालसा कभी नहीं रही। रामजी के दर्शन मात्र से ही संतुष्ट हूँ। ऐसे ईमानदार दिनेंद्र दास जी महाराज निर्मोही अखाड़ा के पूजनीय ईमानदार संत के बारे में भक्त इतने प्रभावित रहते हैं। कि एक आवाज में लाखों भक्त निर्मोही अखाड़ा में जमा हो सकती हैं। लेकिन संत सरल स्वभाव के हैं भगवान राम में उनकी आस्था है।निर्मोही अखाड़ा राम मंदिर आंदोलन का सबसे पुराना पक्षकार रहा है, पर नए ट्रस्ट में उसकी भूमिका बेहद सीमित कर दी गई।
रिपोर्टर - इंद्र बहादुर सिंह
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