बिना भर्ती किए आयुष्मान योजना से ₹5,361 का क्लेम! शिकायत के 15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, पीड़ित ने कोर्ट जाने की दी चेतावनी
अयोध्या : जनपद के सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय कुमारगंज में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कथित फर्जी क्लेम का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती किए बिना ही उसके नाम पर ₹5,361 का क्लेम कर सरकारी धन का भुगतान ले लिया गया। हैरानी की बात यह है कि मामले की शिकायत किए जाने के 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। खंडासा थाना क्षेत्र के अटेसर सरवनपुर गांव निवासी रामनाथ मिश्रा ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अयोध्या डॉ. देवेंद्र कुमार भिटौरिया को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
रामनाथ मिश्रा के अनुसार, उनकी पत्नी तारा देवी के हाथ में चोट लगने पर 22 जून 2026 को उन्हें सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय कुमारगंज की ओपीडी में दिखाया गया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद उनके हाथ में कच्चा प्लास्टर बांधा और उसी दिन घर भेज दिया। इसके बाद 29 जून 2026 को दोबारा अस्पताल पहुंचने पर पक्का प्लास्टर लगाया गया और उन्हें फिर घर भेज दिया गया। प्लास्टर की सुविधा के लिए आयुष्मान कार्ड से दो बार ₹268-₹268 की राशि काटी गई, जिस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। पीड़ित का आरोप है कि घर पहुंचने के बाद उनके मोबाइल पर एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें उनकी पत्नी को 22 जून से 29 जून 2026 तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया था। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को एक और संदेश आया, जिसमें 29 जून से 13 जुलाई 2026 तक भर्ती दर्शाते हुए आयुष्मान योजना के तहत ₹5,361 का क्लेम किए जाने की जानकारी दी गई। जबकि वास्तविकता यह है कि उनकी पत्नी इस पूरी अवधि में एक भी दिन अस्पताल में भर्ती नहीं हुईं और घर पर ही रहकर उपचार कराती रहीं। रामनाथ मिश्रा का कहना है कि यह मामला सरकारी योजना में फर्जी भर्ती दिखाकर धनराशि निकालने का प्रतीत होता है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा है, बल्कि आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत दिए 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सीएमओ कार्यालय की ओर से अब तक न तो कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इससे पीड़ित और उनके परिवार में भारी नाराजगी है। रामनाथ मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वह न्यायालय की शरण लेकर संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करेंगे। फिलहाल इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।
रिपोर्टर : सुनील तिवारी
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