बीजेपी-आरएसएस के बड़े चेहरों को बचाने चंपत राय को क्लीन चिट?एसआईटी पर शिव सिंह का तीखा हमला
अयोध्या : राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान राशि के कथित चोरी प्रकरण में एसआईटी द्वारा राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दिए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव शिव सिंह ने एसआईटी की जांच पर ही सवालों की बौछार करते हुए आरोप लगाया है कि यह क्लीन चिट कहीं प्रभावशाली बीजेपी-आरएसएस से जुड़े चेहरों को बचाने की कवायद तो नहीं?
शिव सिंह ने सवाल उठाया कि जब राम मंदिर की दान और चढ़ावा राशि से जुड़े मामले में लंबे समय से गंभीर सवाल उठते रहे, तो जांच के बाद अचानक जिम्मेदार पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट किस आधार पर दे दी गई? उन्होंने मांग की कि एसआईटी जांच के निष्कर्ष और उन तमाम तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, जिनके आधार पर चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को आरोपों से मुक्त किया गया।
दान के करोड़ों सवाल, लेकिन जवाब सिर्फ क्लीन चिट?सपा नेता ने कहा कि राम मंदिर देश की करोड़ों आस्थाओं का केंद्र है और यहां आने वाली दान राशि के संग्रह, गिनती, निगरानी और जमा करने की व्यवस्था बेहद संवेदनशील विषय है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे तो जांच एजेंसी को हर पहलू की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए थी।
शिव सिंह का आरोप है कि चंपत राय के कार्यकाल में दान राशि से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठते रहे, लेकिन अब क्लीन चिट दिए जाने से जांच की पारदर्शिता पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
'अगर जांच निष्पक्ष है तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?'शिव सिंह ने सीधे सवाल दागते हुए कहा कि अगर एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है, तो उसकी पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने में सरकार और जांच एजेंसी को परेशानी क्यों होनी चाहिए?उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि किन दस्तावेजों, बयानों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों पूर्व पदाधिकारियों को क्लीन चिट दी गई। केवल जांच पूरी होने और क्लीन चिट की घोषणा कर देने से उन सवालों का अंत नहीं हो जाता, जो लंबे समय से सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
राजनीतिक दबाव की आशंका,सार्वजनिक निगरानी में जांच की मांग सपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली राजनीतिक और सामाजिक चेहरों से जुड़े मामलों में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े दान के मामले में जांच ऐसी होनी चाहिए, जिस पर किसी भी राजनीतिक दबाव या प्रभाव की छाया तक न पड़े।
उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच के आधार और निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं तथा यदि जांच को प्रभावित करने के कोई प्रमाण सामने आते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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