श्री राम जन्मभूमि मंदिर सम्बन्धी जानने योग्य विशेष बातें

अयोध्या : अयोध्या में बने भव्य श्री राम मंदिर के बारे में हर रामभक्त को ये 33 बातें जरूर जाननी चाहिए।इतिहास और संघर्ष सन 1528 में बाबर की सेना द्वारा मंदिर तोड़े जाने के बाद से ही अयोध्या के संतों, राजाओं और गृहस्थ समाज ने इस भूमि को वापस पाने के लिए निरंतर संघर्ष किया, जो 1949 में स्थानीय समाज द्वारा उस स्थान पर कब्जा करने के बाद ही बंद हुआ।

1950 से 1989 तक 4 मुकदमे दायर हुए। सभी वादों को वादकारियों ने लड़ा, शासन ने नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के 3 जजों ने 15 साल तक मुकदमा सुना। फैसला लगभग 8500 पन्नों का है, जो 3 भागों में प्रकाशित है। यह फैसला रडार तरंगों द्वारा भूमि के नीचे की फोटोग्राफी, पुरातात्विक उत्खनन, विदेशी विद्वानों के प्राचीन ग्रंथों और गवाहों के बयानों पर आधारित है।

03. सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत से समाधान का मार्ग खोजा। 3 लोगों की मध्यस्थता टोली बनाई - जस्टिस कलीफुल्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू और श्री श्री रविशंकर। मार्च 2019 से जुलाई 2019 तक बैठकें हुईं पर कोई परिणाम नहीं निकला। फिर 06 अगस्त 2019 से 5 जजों की पीठ ने 40 दिन तक लगातार 175 घंटे वकीलों को सुना। 09 नवंबर 2019 को सर्वसम्मत निर्णय हिन्दू समाज के पक्ष में हुआ और मंदिर निर्माण का मार्ग खुला।

ट्रस्ट और निर्माण प्रबंधन:
04. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारत सरकार ने "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र" नाम से स्वतंत्र ट्रस्ट बनाया। कुल 15 ट्रस्टी हैं। एक निर्मोही अखाड़ा, एक SC/ST के लिए सुरक्षित। जिलाधिकारी, UP सरकार और भारत सरकार के IAS प्रतिनिधि पदेन न्यासी। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ट्रस्टी के रूप में निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं, आज इस पर श्री नृपेन्द्र मिश्रा जी हैं। संस्थापक न्यासी वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन जी हैं। उडुपी, पुणे, प्रयागराज, हरिद्वार और अयोध्या से संत तथा अन्य 3 न्यासी हैं।

05 & 06. स्वर्गीय अशोक सिंघल जी के सुझावों पर लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को निर्माण के लिए और टाटा (TCE) को प्रोजेक्ट सलाहकार (PMC) चुना गया। मंदिर के वास्तुकार श्री चन्द्रकान्त भाई सोमपुरा हैं, जिनका चयन स्वयं अशोक जी ने 1986 में ही कर दिया था। अन्य भवनों के लिए नोएडा की फर्म डिजाईन एसोसिएट (जय काकतीकर) को चुना गया।

07 से 10. निर्माण समिति में श्री नृपेन्द्र मिश्रा जी ने अपनी रुचि के कुछ लोगों को जोड़ा। यह भी सत्य है कि नृपेन्द्र जी के कारण ही पत्थरों से बना इतना विशाल मंदिर जून 2020 (कोरोना काल) से शुरू होकर जून 2026 तक पूर्ण रूप से समाज को समर्पित हो गया। बाधा आने पर देश के योग्यतम व्यक्तियों को उन्होंने अयोध्या बुलाकर परामर्श लिया। अधिकांश विद्वानों ने सेवाभाव से, बिना पारिश्रमिक के सुझाव दिए।

श्री अनूप मित्तल जी (पूर्व चेयरमैन NBCC) सिविल इंजीनियर हैं और निर्माण समिति के सदस्य हैं। वे नृपेन्द्र जी के सलाहकार रहे। उनके साथ युवा इंजीनियर यश मित्तल हर बैठक में लैपटॉप पर हर विषय को टाइप करते थे।

अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय UP सरकार की संपत्ति है। नृपेन्द्र जी ने विचार किया कि एक छोटे से कस्बे में दो संग्रहालय व्यावहारिक नहीं हैं। UP सरकार से वार्ता कर 30 साल के लिए संग्रहालय भवन तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लीज पर मिल गया। अब इसका जीर्णोद्धार हो रहा है। राष्ट्रीय संग्रहालय से सेवानिवृत्त श्री संजीब सिंह जी इसकी देखरेख कर रहे हैं। उम्मीद है दिसम्बर 2027 तक यह समाज के लिए खुल जाएगा।

70 एकड़ परिसर में क्या-क्या बना है?
11. भाग-1 में - मुख्य मंदिर, चारों ओर परकोटा, परकोटा में 6 मंदिर, पश्चिम में रिटेनिंग वॉल, शेषावतार मंदिर, सप्तऋषि मंदिर (वशिष्ठ, विश्वामित्र, वाल्मीकि, अगस्त्य, निषाद राज गुह, माता शबरी, माता अहल्या, संत तुलसीदास), कुबेर टीला का विकास, कुबेर टीला पर जटायु की स्थापना, यात्री सुविधा केंद्र, बड़ा शौचालय परिसर, ग्रीन हाउस, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, पावर हाउस, जूता जमा करने के 2 भवन, जहाँ 25 मार्च 2020 से 18 जनवरी 2024 तक रामलला विराजमान थे वहाँ एक मंदिर, बलिदानियों का स्मारक, सड़कें, पानी और सीवर लाइन।

12. भाग-2 (दक्षिणी भाग) में - 23 कमरों का अतिथि भवन, 500 लोगों का सभागृह, ट्रस्ट ऑफिस और पार्किंग। इसका निर्माण UP राजकीय निर्माण निगम और देखरेख इंजीनियर इंडिया लिमिटेड (EIL) ने की।

13. पूरे 70 एकड़ के चारों ओर 3.25 KM लंबी सुरक्षा दीवार। CRPF के परामर्श से ऊँचाई और सुरक्षा टॉवर बनाए गए हैं।

14 & 15. यात्री सेवा केंद्र: बिरला धर्मशाला के सामने, सुग्रीव किला के नीचे रामपथ से सटकर UP सरकार से जमीन खरीदी गई, जहाँ पहले बस अड्डा था। वहाँ लोहे का 2 मंजिला भवन ट्रस्ट ने बनाया है।

रामपथ पर निषादराज चौराहा से वीणा चौक तक गर्मी या बरसात में यात्रियों के लिए कोई छाया नहीं है। इसलिए यात्री सेवा केंद्र पर सभी सुविधाएं दी गई हैं - पुरुष/महिला अलग शौचालय, शुद्ध पेयजल, मोबाइल/जूता/बैग रखने के लिए लॉकर, माताओं के लिए स्तनपान कक्ष, 300 से अधिक कुर्सियाँ, व्हील चेयर, आरती पास की व्यवस्था, समर्पण स्वीकार केंद्र, सत्य साईं सेवा ट्रस्ट बेंगलुरु की ओर से एलोपैथिक चिकित्सा, ट्रस्ट की ओर से होम्योपैथिक चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, रेलवे टिकट काउंटर। सभी सेवाएं निःशुल्क हैं, ट्रस्ट ने कभी कोई पैसा नहीं लिया।

दर्शन व्यवस्था:
16 से 22. रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री जी और सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के करकमलों से हुई। तब से प्रतिदिन 75,000 से अधिक दर्शनार्थी आते हैं। कुंभ मेला (जन-फर 2025) में प्रतिदिन 3 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या आए, फिर भी कोई दुर्घटना नहीं हुई।

- दर्शन सुबह 6:30 से रात 9:45 तक। दोपहर 12:30 से 1:00 बजे तक 20 मिनट के लिए ठाकुर जी के विश्राम हेतु पट बंद होते हैं।
- प्रवेश द्वार से ही लाइनों में लगाया जाता है, Q सिस्टम बहुत अच्छा है, कोई टकराता नहीं, बीच-बीच में बैठने और पेयजल की सुविधा है।
- रामलला के दर्शन हेतु 8 पंक्तियाँ हैं - 1 विशिष्ट दर्शन, 1 सुगम/व्हील चेयर दर्शन, 6 सामान्य पंक्ति। सभी का आना-जाना अलग है, कहीं क्रिस क्रॉस नहीं, इसलिए एक दिन में 2 लाख लोगों का दर्शन सुगम होता है। रामानंदाचार्य प्रवेश द्वार (रामपथ) से प्रवेश, यात्री सुविधा केंद्र पर सामान जमा, रामलला व राम परिवार दर्शन, फिर सामान लेकर बाहर - इसमें केवल 1 घंटा लगता है, भीड़ में अधिकतम 2 घंटे। पूरा परिसर (लोवर प्लिंथ के रामायण प्रसंग, परिक्रमा मार्ग के सभी मंदिर, शेषावतार, सप्त मंदिर, कुबेर टीला, बलिदानी स्मारक) देखने में 1-2 घंटा और लगता है।

विशेष सुविधाएं
23 से 27 चलने में असमर्थ वृद्ध/दिव्यांग श्रद्धालु ट्रस्ट की निःशुल्क व्हील चेयर से दर्शन कर सकते हैं।
60 साल से ऊपर के ज्येष्ठ नागरिक, दिव्यांग, शारीरिक अस्वस्थ, गर्भवती माता, 5 साल से छोटे बच्चों की माँ - अपने साथ एक व्यक्ति सहित निःशुल्क सुगम दर्शन पास यात्री सेवा केंद्र पर कागज दिखाकर (बिना किसी प्रभाव/पहचान के) ले सकते हैं।

ट्रस्ट की सभी सेवाएं - दर्शन पास, आरती पास, प्रसाद - निःशुल्क हैं।
परिसर में भजन, कीर्तन, सुंदरकांड, संगीत, नृत्य सेवा करने वाले समूह को कार्यक्रम के लिए योग्य व्यवस्था निःशुल्क दी जाती है, कार्यक्रम के बाद सुगमता से मंदिर दर्शन भी कराया जाता है।

मंदिर के अर्चक शुद्ध रूप से ठाकुर जी के राग-भोग, वेद/रामायण/विष्णु सहस्त्रनाम परायण में लगे रहते हैं। वे श्रद्धालु को दर्शन कराना या पूजा कराकर दक्षिणा लेने का कार्य नहीं करते।

पारदर्शिता
28 से 33 ट्रस्ट का बैंक अकाउंट बिना चेक बुक वाला है। सभी भुगतान RTGS/ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर से ही होते हैं, नकद का उपयोग नहीं होता, अतः आर्थिक व्यवहार में पूरी पारदर्शिता है। सभी लेन-देन में सरकारी नियमों (GST, TDS, Registry stamp-fees, labour cess, PF, ESI) का पालन होता है, सरकार के किसी टैक्स में कभी चोरी नहीं की गई।

ट्रस्ट के खाते तीन बैंकों में हैं - SBI, PNB, Bank of Baroda। ट्रस्ट ने बैंक से कोई चेक बुक नहीं ली है। आंतरिक अंकेक्षण दिल्ली की एक ऑडिट फर्म द्वारा और वैधानिक अंकेक्षण दिल्ली की ही ख्यातिप्राप्त फर्म वी. शंकर अय्यर द्वारा किया जाता है।

शायद ही देश के किसी मंदिर में इतनी अधिक संख्या में, इतनी सुविधा से और इतने कम समय में सुव्यवस्थित दर्शन होते हों।

मंदिर में प्रत्येक दर्शनार्थी को प्रत्येक निकास मार्ग पर भगवान का प्रसाद पैकेट निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
(चम्पतराय)
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या

रिपोर्टर : आईबी सिंह

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.