मिल्कीपुर में यूजीसी और आरक्षण के विरोध में अधिवक्ताओं का जोरदार प्रदर्शन, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

मिल्कीपुर/अयोध्या : दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण और यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन की गूंज अब अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील परिसर तक पहुंच गई है। गुरुवार, 27 अगस्त को बार एसोसिएशन मिल्कीपुर के अध्यक्ष अमित कुमार मिश्रा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने आरक्षण व्यवस्था और यूजीसी से संबंधित कानून के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के साथ क्षेत्रीय लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों तक पहुंचना चाहिए।

प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मिल्कीपुर पवन कुमार शर्मा को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि देश में सभी वर्गों के लोगों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाए और आर्थिक रूप से कमजोर तथा जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को प्राथमिकता दी जाए।

अधिवक्ताओं ने यह भी मांग उठाई कि आर्थिक रूप से सक्षम हो चुके लोगों तथा सांसद, विधायक, आईएएस, पीसीएस अधिकारी और बड़े उद्योगपतियों आदि को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाए, ताकि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों को मिल सके।

यूजीसी से संबंधित कानून वापस लेने की मांग

ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने यूजीसी से संबंधित कानून को 'काला कानून' बताते हुए इसे बिना शर्त वापस लेने की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना था कि सरकार को ऐसे प्रावधानों पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिनको लेकर आम लोगों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में संविधान की मूल भावना और समानता के सिद्धांत को राजनीतिक हितों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार से आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू करने और यूजीसी से संबंधित कानून को वापस लेने की दिशा में शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

धरना-प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपकर अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते रहेंगे।

रिपोर्टर : सुनील तिवारी

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