खुराफाती तंत्रों द्वारा सांसद किशोरी लाल शर्मा को बदनाम करने की साजिश
गौरीगंज - में बिखरे पड़े मिले पर्चे 40% कमीशन का आरोप कांग्रेस पार्टी सूत्रों ने बताया आरोप पूरी तरह निराधार किशोरी लाल शर्मा धरातल से जुड़े पुराने कांग्रेसी ईमानदार नेता 50 सालों से राजनीति में राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, परिवार के खासम खास कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा जो क्षेत्र में एक लोकप्रिय नेता के रुप में माने जाते हैं, उनकी सांसद निधि को लेकर जो सि यासी घमासान खड़ा हुवा है। बिना सिर पर के निराधार वायरल खबरों के वायरल खबर ससे मिली जानकारी के मुताबिक गौरीगंज तहसील कार्यालय के पास सड़क पर बड़ी संख्या में गुमनाम पर्चे पंपलेट बिखरे मिले इन पर्चों पर लिखा था सांसद जी जवाब दीजिए, निधि का 40 प्रतिशत क्यों लिया हिसाब दीजिए।
पर्चे में इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर सेनानी और देवमणि से जुड़े 2 लाख रुपये के एक मामले को लेकर भी सांसद की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। यह पर्चे ठीक सांसद किशोरी लाल शर्मा के एक कार्यक्रम से पहले बिखरे पाए गए जिससे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी वीडियो में भी इसी घटना का जिक्र है, दरअसल 40% कमीशन का आरोप नया नहीं है। यह सांसद निधि MPLADS से जुड़ा एक पुराना जुमला है।
एक अखबार की एक पुरानी स्पेशल रिपोर्ट में बताया गया था कि आम धारणा है कि सांसद निधि का 40% दफ्तर में 20% ठेकेदार जनप्रतिनिधि में बंट जाता है और सिर्फ 40% जमीन पर लगता है।
इसी धारणा को आधार बनाकर विरोधियों द्वारा इस तरह के पर्चे अक्सर फेंके जाते हैं
सांसद निधि सीधे सांसद के हाथ में नहीं आती है, नियम अनुसार हर सांसद को सालाना 5 करोड़ की निधि मिलती है, जो जिला प्रशासन DM के पास जाती है। सांसद सिर्फ काम की सिफारिश करता है, पैसा जिला प्रशासन ही जारी करता है।
अभी तक इस पर्चा कांड को लेकर न तो कोई FIR दर्ज हुई है, न ही प्रशासन ने 40% कमीशन के आरोप की कोई पुष्टि की है।
यह एक गुमनाम पर्चा है। सांसद किशोरी लाल शर्मा लगातार अमेठी में सक्रिय हैं
हाल ही में उन्होंने गौरीगंज रिंगरोड को NH-128 में शामिल कराने और 54 लाख के ट्रॉली ट्रांसफार्मर जैसे विकास समाज से जुड़े कार्य कराए हैं।
सूत्रों की माने तो यह विरोधियों की ओर से सांसद की छवि खराब करने के लिए किया गया एक सियासी खड्यंत्र है
अमेठी गांधी परिवार का गढ़ रहा है और किशोरी लाल शर्मा गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं,
इसलिए उनके खिलाफ इस तरह की पर्चेबाजी पहले भी होती रही है।
रिपोर्टर आईबी सिंह
No Previous Comments found.