मछली खाई तो इस्तीफा दूंगा! अजय राय ने योगी आदित्यनाथ को दी बड़ी चुनौती
अयोध्या...भगवान श्रीराम की नगरी...सावन का पवित्र महीना...और इसी धार्मिक नगरी में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान कथित मछली भोज को लेकर यूपी की सियासत में ऐसा बवाल मचा है कि बयानबाजी से लेकर आरोप-प्रत्यारोप तक सब कुछ तेज हो गया है। बीजेपी कांग्रेस पर सनातन और धार्मिक भावनाओं के अपमान का आरोप लगा रही है, संत समाज नाराज है, हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है, तो कांग्रेस इस पूरे विवाद को बीजेपी की राजनीति बता रही है। जी हां मामला इतना गरमा गया कि यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बीजेपी को खुली चुनौती दे दी। अजय राय ने साफ कहा कि अगर उनकी मछली खाते हुए एक भी तस्वीर सामने आ जाए तो वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे देंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा कि अगर ऐसी तस्वीर नहीं मिलती है तो योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। ऐसे में अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अयोध्या में मछली भोज हुआ या नहीं... सवाल यह भी है कि आखिर कार्यक्रम में क्या हुआ था? मछली किसके लिए बनाई गई थी? क्या अजय राय ने मछली खाई? आइए जानते है।
दरअसल, यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय रविवार को अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने रामलला और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वह पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ गोसाईगंज क्षेत्र में कांग्रेस समर्थक राम दयाल निषाद के घर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे। बताया गया कि अजय राय के स्वागत के लिए कार्यक्रम रखा गया था। इसी कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के लिए मछली-भात भोज की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई। कार्यक्रम की खबर जैसे ही सामने आई, बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया और देखते ही देखते मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। खास तौर पर सावन का महीना और अयोध्या की धार्मिक पहचान इस विवाद के केंद्र में आ गई। बीजेपी का आरोप है कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में, वह भी सावन के पवित्र महीने में, इस तरह का मछली भोज आयोजित करना सनातनी भावनाओं का अपमान है। वहीं विवाद बढ़ा तो अजय राय ने खुद सामने आकर सफाई दी। अजय राय का कहना है कि...
वह निषाद समाज के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। उन्होंने कहा कि निषाद समाज की अपनी परंपराएं हैं और मछली पकड़ना तथा खाना उनकी परंपरा का हिस्सा है। उनका कहना है कि वह केवल कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। अजय राय ने कहा कि कार्यक्रम में टेंट के पीछे क्या बनाया जा रहा था, इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस दिन एकादशी थी और उन्होंने चावल तक नहीं खाया था। ऐसे में मछली खाने या मछली भोज कराने की बात कहां से आई, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
लेकिन आपको बता दें अजय राय ने सिर्फ सफाई देकर मामला खत्म नहीं किया...बल्कि बीजेपी को ऐसी चुनौती दे डाली, जिसने पूरे विवाद को और ज्यादा गरमा दिया। जी हां अजय राय ने कहा कि अगर मेरी मछली खाते हुए तस्वीर है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसे जारी करें। अगर तस्वीर सामने आ गई तो मैं प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दूंगा। लेकिन अगर बीजेपी ऐसी तस्वीर नहीं दिखा पाती है तो योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। यानी अजय राय ने सीधे-सीधे बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुली चुनौती दे दी। इतना ही नहीं अजय राय ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से जुड़े एक पुराने विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की आंध्र प्रदेश में मुर्गा खाने की तस्वीरें वायरल हुई थीं, लेकिन उसे कटहल बताया गया। अजय राय ने दावा किया कि दक्षिण भारत में कटहल को उस तरह खाने का सवाल ही नहीं है और बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि मुर्गा खाकर उसे कटहल बता दिया गया। वहीं उधर बीजेपी इस पूरे मामले को हाथ से जाने देने के मूड में नहीं है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी है और सावन का महीना सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसे में इस दौरान अयोध्या में मछली भोज का आयोजन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। यानी बीजेपी ने इस मुद्दे को सीधे कांग्रेस की संस्कृति और सनातन आस्था से जोड़ दिया है।
लेकिन आपको बता दें इस विवाद में सिर्फ बीजेपी ही नहीं...अयोध्या के संत समाज की आवाज भी सामने आई है। अयोध्या के संतों ने मछली भोज के कथित आयोजन पर नाराजगी जाहिर की है। हनुमानगढ़ी और साकेत भवन के पीठाधीश्वर समेत कई संतों ने इस आयोजन पर सवाल उठाए हैं।
यानी अब यह मामला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संत समाज और धार्मिक संगठनों की नाराजगी भी खुलकर सामने आ गई है। फिलहाल तस्वीर साफ है कि अयोध्या का यह कथित मछली भोज अब सिर्फ एक स्थानीय कार्यक्रम नहीं रह गया है। यह यूपी की राजनीति में आस्था बनाम राजनीति की बहस का नया मुद्दा बन चुका है। एक तरफ बीजेपी है, जो इसे सावन, अयोध्या और सनातन आस्था से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस है, जो बीजेपी पर निषाद समाज का अपमान करने और राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। सवाल कई हैं...क्या वास्तव में अजय राय ने मछली खाई? क्या उनके पास मछली खाने की कोई तस्वीर है? क्या कार्यक्रम में मछली बन रही थी? अगर बन रही थी तो किसके लिए? फिलहाल अब सबकी नजर उस कथित तस्वीर पर है, जिसके लिए अजय राय ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी है।
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