राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश के आरोपों पर योगी का पलटवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त वो भूचाल आया है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी थर्मामीटर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है! अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव का महा-दंगल होना है, लेकिन अखाड़ा अभी से सज चुका है। और इस बार लड़ाई का अखाड़ा बना है...अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम में हुई कथित चोरी का मामला! जी हां भाजपा लोकसभा चुनाव में अयोध्या की सीट क्या हारी, विपक्ष को जैसे संजीवनी मिल गई। अब मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को ऐसा लपका है कि वो इसे सीधे-सीधे 'बीजेपी बनाम भगवान राम' की लड़ाई बनाने में जुट गए हैं। अखिलेश भाई तो सार्वजनिक मंचों से दहाड़ रहे हैं कि, "ये चोरी मैंने ही पकड़ी है!" और तो और, उन्होंने इस घटना की तुलना सीधे विदेशी आक्रमणकारी मोहम्मद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर को 17 बार लूटे जाने से कर दी है! अखिलेश का सीधा आरोप है कि बीजेपी और उनके लोगों ने भगवान के चंदे को भी नहीं छोड़ा। लेकिन शायद वो भूल गए कि सामने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ खड़े हैं, जो ऐसी गुगली फेंकने में माहिर हैं कि बल्लेबाज चारों खाने चित हो जाए। चुनावी साल में इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए खुद सीएम योगी मैदान में उतरे और पिछले कुछ दिनों में अखिलेश यादव पर एक के बाद एक ऐसे 5 तीखे पलटवार किए हैं कि सपा का दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। आइए, इस पूरे सियासी दंगल की इनसाइड स्टोरी जानते हैं...

आगे हम आपको कुछ बताए उससे पहले आप ये समझ लीजिए कि ये पूरा बखेड़ा है क्या। दरअसल, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी ने तगड़ा एक्शन लेते हुए 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया था। एक्शन ऐसा हुआ कि इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है! इतना ही नहीं, इस विवाद की आंच इतनी तेज थी कि ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और प्रमुख सदस्य अनिल राय को अपने पदों से इस्तीफा तक देना पड़ गया। फिलहाल यह पूरा मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पेंडिंग है और अब विपक्षी पार्टियां इस पूरे केस की जांच CBI को सौंपने की पुरजोर मांग उठा रही हैं। वहीं अब बात करते हैं उस जुबानी जंग की, जिसने यूपी की राजनीति में आग लगा रखी है। सीएम योगी ने अखिलेश यादव को घेरने के लिए चुन-चुनकर तीर चलाए हैं। 
दरअसल, हाथरस की जनसभा में सीधे अखिलेश यादव की आंख में आंख डालकर सीएम योगी ने चुनौती दी। योगी ने कहा.."अखिलेश जी, अयोध्या को रामभक्तों ने सजा और संवार दिया है, आप उसकी चिंता छोड़िए। पहले अपने किए का पश्चाताप कीजिए और एक बार जाकर रामलला का दर्शन कर लीजिए, कम से कम इससे आपको सद्बुद्धि आ जाएगी! 

वहीं देवरिया की एक रैली में सीएम योगी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव और मुलायम सिंह सरकार के दौर के उस काले अध्याय को याद दिला दिया। योगी ने गरजते हुए कहा कि "जो लोग कभी 'जय श्री राम' बोलने पर रामभक्तों और कारसेवकों पर लाठियां और गोलियां बरसाते थे, आज वे कह रहे हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है! 

दरअसल, अखिलेश यादव ने दांव चला था कि 2027 में अगर सपा की सरकार बनी, तो वो अयोध्या को एक सच्ची धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे। इस पर योगी ने ऐसा तंज कसा कि सपा खेमा तिलमिला गया। योगी ने कहा कि "आप क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे? अपना इतिहास उठाकर देखिए। 2017 से पहले आपकी सरकार में विकास का सारा पैसा कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल बनाने में खर्च होता था! हमारी सरकार ने उसे रोका और मंदिरों के सौंदर्यीकरण में लगाया। आपकी सरकार में थानों और जेलों में जन्माष्टमी मनाने तक पर रोक थी, कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध था।  

वहीं इधर, प्रयागराज के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी चुप बैठने वाले नहीं थे। उन्होंने भी पलटवार करते हुए कहा कि हम समाजवादी लोग भी चाहते हैं कि सनातन धर्म की रक्षा हो, लेकिन सनातन की आड़ में कोई गोरखधंधा नहीं होना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम के मंदिर में चंदा घोटाला एक ऐसा पाप है, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। अखिलेश ने यह भी तंज कसा कि सरकार इस मुद्दे को इसलिए भटका रही है ताकि युवाओं के पेपर लीक का मुख्य मुद्दा कहीं दब न जाए। 

तो कुल मिलाकर कहानी ये है कि अयोध्या का चंदा कांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक कुरुक्षेत्र बन चुका है! अखिलेश यादव जहां इसे सोमनाथ की लूट बताकर बीजेपी के हिंदू कार्ड की हवा निकालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ ने मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि का पासा फेंककर अखिलेश को उनके ही बुने जाल में फंसाने का तगड़ा चक्रव्यूह रच दिया है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी समर के इस दंगल में जनता जनार्दन किसकी बातों पर भरोसा करती है। क्या अखिलेश का चंदा चोरी वाला तीर सटीक बैठेगा या फिर योगी का मथुरा कार्ड सपा के सारे समीकरणों को ध्वस्त कर देगा? यूपी की सियासत का यह हाई-वोल्टेज ड्रामा अभी तो बस शुरू हुआ है, आगे-आगे देखिए होता है क्या!

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