राम मंदिर चंदा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी कर्मचारी के घर मिले लाखों रुपये

रामलला के दरबार से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है। अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से चंदा चोरी के आरोपों ने अब एक बड़े सियासी और आपराधिक घोटाले का रूप ले लिया है। विपक्ष के तीखे हमलों के बीच योगी सरकार ने हाई-लेवल SIT जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं, जांच एजेंसियों को आरोपी कर्मचारी के घर से, अलमारी ही नहीं बल्कि गोबर के ढेर से भी लाखों रुपये की नकदी मिली है। आइए जानते हैं क्या है इस चंदा चोरी की पूरी इनसाइड स्टोरी।

इस पूरे मामले की शुरुआत जून के पहले हफ्ते में हुई..अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा किए गए नियमित ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने की आशंका सामने आई। जब मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली गई, तो वहां तैनात एक कर्मचारी की गतिविधियां बेहद संदिग्ध पाई गईं। इसके बाद ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की, जिसे शुरुआत में गोपनीय रखा गया था। मामला जैसे ही बाहर आया, उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई...7 जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगी सरकार को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर 'डबल इंजन सरकार' के दूरबीन और ड्रोन सही से काम कर रहे होते, तो चढ़ावे में इतनी बड़ी चोरी न होती। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी इसे करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। चौतरफा घिरी सरकार के बीच बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कानपुर दौरे पर माना कि मामले में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

13 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक हाई-लेवल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया। यह कदम खुद 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के अनुरोध पर उठाया गया ताकि मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशों को रोका जा सके और सच सामने आए। इस तीन सदस्यीय टीम में लखनऊ के डिविज़नल कमिश्नर (IAS) विजय विश्वास पंत, आईजी (IPS) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। इस मामले में जांच एजेंसियों के हाथ जो सबूत लगे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं..13 जून को चढ़ावे की रकम गिनने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर छापेमारी की गई। वहां से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए। हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ रकम अलमारी में थी, तो कुछ को घर के बाहर गोबर के ढेर में दबाकर छिपाया गया था। 

हिरासत में लिए गए दोनों कर्मचारियों का मासिक वेतन महज 18 से 20 हजार रुपये था। लेकिन जांच में पता चला है कि हाल ही में एक कर्मचारी ने करीब 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी, जबकि दूसरे ने 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है। इतनी कम सैलरी में इतनी महंगी संपत्तियां जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। इसी बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी अयोध्या पहुंचे, हालांकि उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उनका काम सिर्फ मंदिर निर्माण की निगरानी तक सीमित है।

राम मंदिर का यह चंदा चोरी विवाद अब केवल एक वित्तीय हेराफेरी नहीं, बल्कि देश के करोड़ों राम भक्तों के विश्वास से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। महज 18 हजार पाने वाले कर्मचारियों के पास करोड़ों की संपत्ति और गोबर के ढेर से लाखो का कैश मिलना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। अब देखना होगा कि आईएएस और आईपीएस अफसरों की यह SIT टीम इस घोटाले की तह तक कब तक पहुंच पाती है। 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.