अयोध्या से बड़ी खबर! राम मंदिर मामले में 6 लोगों पर FIR की तैयारी
अयोध्या नगरी...जहां प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर बना, इन दिनों वहां की एक घटना ने सियासत से लेकर आस्था के गलियारों तक महाभूकंप ला दिया है! जी हां, हम बात कर रहे हैं राम मंदिर में हुए कथित दान और चंदा चोरी के महा-घोटाले की! करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट की ये ऐसी सनसनीखेज कहानी है, जिसमें अब बड़े-बड़े नामों पर गाज गिरने वाली है! SIT की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है और 6 लोगों के खिलाफ सीधे FIR दर्ज होने जा रही है! एक तरफ आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह सबूतों का पुलिंदा लेकर लखनऊ में SIT दफ्तर पहुंच चुके हैं, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने सरकार पर ऐसा तीखा हमला बोला है कि सीधे SIT के नाम का ही मतलब बदल दिया है! क्या है इस चंदा चोरी का पूरा सच? किसने किया आस्था का सौदा? आइए देखते हैं इस महा-विवाद की इनसाइड स्टोरी!
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और जमीन खरीद में हुई कथित हेराफेरी के मामले ने अब एक भयानक कानूनी और सियासी रूप ले लिया है। इस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी SIT की कई बड़ी सिफारिशों को मान लिया गया है, जिससे आरोपियों के खेमे में हड़कंप मच गया है। इस पूरे मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर यह है कि SIT की रिपोर्ट के आधार पर बहुत जल्द 6 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज होने जा रही है। इस एफआईआर की जद में राम मंदिर में कार्यरत कुछ कर्मचारी भी आ रहे हैं, जिन पर अंदरूनी तौर पर गड़बड़ी करने का आरोप है। शुरुआती जांच में पता चला है कि अभी तक एक करोड़ रुपये से कम की राशि में बड़ी हेराफेरी सामने आ चुकी है।
इसके साथ ही, SIT ने सिफारिश की है कि मंदिर की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एक CEO की नियुक्ति की जाए। इस सिफारिश पर राम मंदिर ट्रस्ट भी तैयार हो गया है और माना जा रहा है कि किसी रिटायर्ड बड़े अधिकारी को राम मंदिर का CEO बनाया जा सकता है। वहीं इस पूरे मामले को उजागर करने वाले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह पूरी तैयारी के साथ लखनऊ पहुंचे। वे अपने साथ इस कथित घोटाले से जुड़े बेहद अहम और पुख्ता दस्तावेज लेकर आए। संजय सिंह ने कहा, 'मेरे पास इस पूरे जमीन घोटाले के पक्के सबूत हैं। कुल 13 जमीनों के दस्तावेज मेरे हाथ में हैं, जिनमें से 2 जमीनों के मामले आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।' संजय सिंह का आरोप है कि 50 लाख की प्रॉपर्टी को राम मंदिर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये में बेचा गया और इस डील को सीधे-सीधे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हरी झंडी दिखाई। संजय सिंह लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और SIT के सामने पेश होकर ये सारे सबूत और अपना बयान दर्ज करवा चुके हैं।
वहीं एक तरफ जहां जांच की आंच तेज हो रही है, वहीं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने SIT जांच का हवाला देते हुए ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, दान और बैंक खातों से जुड़ी कोई भी जानकारी पब्लिक करने या देने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के स्थानीय बीजेपी नेता रजनीश सिंह के द्वारा लिखे गए पत्र पर जब जिला प्रशासन ने राममंदिर ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी तो जांच का हवाला देकर ट्रस्ट ने आए हुए संपत्ति का विवरण देने से मना कर दिया। इसी बीच सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया कि चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने सामने आकर इन खबरों का पूरी तरह खंडन किया। उन्होंने राम भक्तों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें, अभी SIT की अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है और जांच के बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसा और कहा, 'अयोध्या में महापाप हुआ है! देश-दुनिया से आए श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है, लेकिन हैरान करने वाली बात है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक FIR तक दर्ज नहीं की गई।' अखिलेश ने SIT की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा: "SIT का मतलब अब 'शेयर इन थेफ्ट' यानी चोरी में हिस्सेदारी हो गया है! बिना FIR के SIT वैसी ही है जैसे बिना तीर की कमान। अगर सरकार गंभीर है, तो सबसे पहले मुकदमा दर्ज क्यों नहीं करती?" इतना ही नहीं अखिलेश यादव ने दावा किया कि अगर उत्तर प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र से औसतन 10 करोड़ रुपये का भी चढ़ावा आया हो, तो यह रकम सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
देखा जाए तो बात सिर्फ पैसों की हेराफेरी की नहीं है...बात है देश के कोने-कोने से अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक रुपया प्रभु श्री राम के चरणों में सौंपने वाले उन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की, जिनका भरोसा इस खबर से डगमगाया है। जब अपनों ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हों, तो साफ है कि मामला बेहद गंभीर है। ऐसे में सवाल है कि क्या SIT की FIR के बाद सच में बड़े चेहरों को जेल की हवा खानी पड़ेगी? क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले को CBI के हवाले करेगा? और सबसे बड़ा सवाल क्या राजनीति के इस खेल में प्रभु राम के नाम पर हुआ यह कथित घोटाला उत्तर प्रदेश की सत्ता का रुख बदल देगा? इन सारे सुलगते सवालों के जवाब आने वाले वक्त में मिलेंगे।
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