हिडन कैमरे से खुला राज? राम मंदिर मामले में बड़ा खुलासा

आस्था के सबसे बड़े केंद्र...प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर से एक ऐसी शर्मनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है! जी हां, जिस राम मंदिर में देश-दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक रुपया और सोने-चांदी के जेवरात श्रद्धा से चढ़ा रहे थे, उसी मंदिर के भीतर आस्था पर डकैती डाली जा रही थी! चंदे और चढ़ावे की चोरी का एक ऐसा मास्टर प्लान चल रहा था, जिसका खुलासा जब SIT की जांच रिपोर्ट में हुआ, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के ठीक दो दिन बाद, राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या पुलिस ने 8 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इस FIR में कोई साधारण जेबकतरे नहीं हैं...बल्कि इसमें तो ट्रस्ट के बड़े-बड़े दिग्गजों के खास लोग, उनके ड्राइवर और उनके रिश्तेदार शामिल हैं, जो एक संगठित गिरोह की तरह इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे थे! आइए आपको बताते हैं इस महा-पाप की पूरी इनसाइड स्टोरी, वो हिडन कैमरे का खेल और इन 8 गुनहगारों की कुंडली!

दरअसल, यह पूरा मामला तब खुला जब मई महीने के आखिरी हफ्ते में राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा। हर बार एक दान पेटी से करीब 7 से 8 लाख रुपये निकलते थे, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से अचानक 500-500 के नोटों की गड्डियां कम होने लगीं। चढ़ावा लगातार बढ़ रहा था, लेकिन बैंक में रकम घट रही थी! जब शक गहराया, तो अधिकारियों ने नोट गिनने वाले रूम में चुपके से कुछ हिडन कैमरे लगवा दिए। और फिर जो कैमरे में रिकॉर्ड हुआ, उसने सबके होश उड़ा दिए! जब एक हफ्ते की फुटेज देखी गई, तो पता चला कि ये शातिर चोर सीसीटीवी कैमरों के सामने जानबूझकर खड़े हो जाते थे ताकि उनकी हरकतें रिकॉर्ड न हों, और कैमरे की आड़ में नोटों की गड्डियों से पैसे निकालकर अपने कपड़ों में छुपा लेते थे। लेकिन वो भूल गए कि ऊपर हिडन कैमरा भी लगा है, जिसने इनका सारा खेल खोल दिया! आपको बता दें इन चोरों का दिमाग इतना शातिर था कि ये सिर्फ नोट जेब में नहीं रख रहे थे, बल्कि इन्होंने अकाउंटिंग को धोखा देने का एक नया तरीका निकाल रखा था। 

हिडन कैमरे में देखा गया कि नोट गिनने वाले ये कर्मचारी हर गड्डी में कुछ एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते थे। जब बैंक को पैसे भेजे जाते, तो बैंक वाले हर गड्डी के एक-एक नोट को गिनने के बजाय सिर्फ गड्डियों की संख्या गिनते और वाउचर फाइनल कर देते थे। लेकिन जब यह रकम मंदिर से निकलकर बैंक के लिए रवाना होती, उसी रास्ते के दौरान गड्डियों में लगाए गए वो एक्स्ट्रा नोट चुपके से निकाल लिए जाते थे! इस तरह कागजों पर वाउचर का मिलान भी बिल्कुल परफेक्ट रहता और बीच में से लाखों रुपये गायब भी हो जाते थे! इतना ही नहीं, ये पापी सिर्फ कैश नहीं चुरा रहे थे, बल्कि श्रद्धालु जो श्रद्धा से प्रभु राम लला के लिए सोने-चांदी के जेवरात दान करते थे, उन्हें तो ये लोग बही-खाते में लिखने से पहले ही गायब कर देते थे! यानी लिखा-पढ़ी बाद में होती थी, चोरी पहले! वहीं इस पूरे खेल में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी आरोपी किसी न किसी बड़े पदाधिकारी की सिफारिश या रिश्तेदारी के दम पर मंदिर के अंदर घुसे थे। आइए आपको बताते हैं इन 8 नामजद आरोपियों का क्या काम था....

आरोपी नंबर 1: रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव--चंपत राय का ड्राइवर...

आपको बता दें यह इस पूरे कांड का सबसे बड़ा और मुख्य किरदार माना जा रहा है। यह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी और पूर्व ड्राइवर है। व्यवस्थापक होने के नाते मंदिर में इसकी तूती बोलती थी। यह बेरोकटोक कहीं भी आ-जा सकता था, यहाँ तक कि इसकी बुलेट गाड़ी सीधे मंदिर के अंदर जाकर खड़ी होती थी। कैश रूम की चाबी इसी के पास रहती थी।

आरोपी नंबर 2: सुभाष चंद्र श्रीवास्तव--गणना प्रभारी...

यह SBI से रिटायर्ड बैंक कर्मचारी है। इसे नोटों की गिनती का इंचार्ज बनाया गया था। स्टाफ पर नजर रखने और किसकी ड्यूटी कहाँ लगेगी, यह तय करना इसी का काम था। आरोप है कि इसी ने इस चोरी के खेल में बाकी लोगों को शामिल किया।

आरोपी नंबर 3: अनुकल्प मिश्रा...

यह ट्रस्ट के एक अन्य बड़े पदाधिकारी अनिल मिश्रा का रिश्तेदार बताया जा रहा है। यह चढ़ावे के वाउचर बनाने और नोट गिनने के काम में पिछले दो साल से लगा था। वाउचर में हेरा-फेरी करने का मुख्य जिम्मा इसी का था।

आरोपी नंबर 4: लवकुश मिश्रा...

यह अनुकल्प मिश्रा का साला है और यह भी अनिल मिश्रा का रिश्तेदार बताया जा रहा है। यह भी नोट गिनने की टीम में शामिल था। जब पुलिस ने इसके घर पर रेड मारी, तो इसके घर से करीब 10 लाख रुपये की चोरी की नकदी बरामद हुई!

आरोपी नंबर 5: मनीष यादव...

यह मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का सगा भतीजा है। टिन्नू ने ही सिफारिश करके इसे नोट गिनने के काम में लगवाया था। इसके जिम्मे दानपात्र से नकली नोट निकालना और उसे अलग रखने का काम था, जिसकी आड़ में यह असली नोट गायब करता था। इसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई है।

आरोपी नंबर 6: अविनाश शुक्ला...

इसका काम दानपात्रों से पैसे निकालना और उन्हें गणना कक्ष तक पहुंचाना था। जब ट्रस्ट ने इसके बैंक खातों की जांच की, तो पता चला कि चढ़ावा चोरी का एक बड़ा हिस्सा अविनाश सीधे अपने पर्सनल बैंक खाते में जमा करा रहा था। इसके खाते से 5 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

आरोपी नंबर 7: करुणेश पांडेय..

इसका काम भी चढ़ावे को कलेक्ट करना और उसे काउंटिंग रूम तक पहुंचाना था। करुणेश पर आरोप है कि इसने इस दान की राशि को चुरा-चुराकर बाहर बड़ी संपत्तियां अर्जित कर ली हैं।

आरोपी नंबर 8: रमाशंकर मिश्र...

यह भी नोट गिनने की टीम का हिस्सा था और अनुकल्प व लवकुश के साथ मिलकर इस पूरी आपराधिक साजिश में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा था।

आपको बता दें यह पूरा मामला सबसे पहले 6 जून को सामने आया था। जब बात बढ़ी, तो सरकार ने 13 जून को इसकी जांच के लिए एक SIT गठित कर दी। SIT ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, जिसमें तुरंत FIR की सिफारिश की गई थी। लेकिन जब दो दिन तक FIR दर्ज नहीं हुई, तो विपक्ष और जनता में सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी तुरंत केस दर्ज करने की हुंकार भरी। जिसके बाद आखिरकार, गुरुवार 25 जून की शाम को अयोध्या के रामजन्मभूमि थाने में इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। वहीं पुलिस ने टिन्नू यादव समेत सात आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे बंद कमरे में कड़ी पूछताछ की जा रही है। ड्यूटी खत्म होने के बाद इन कर्मचारियों की तलाशी न लेना सबसे बड़ी लापरवाही थी, जिसका फायदा उठाकर इन्होंने करोड़ों का गबन कर डाला।

तो देखा आपने इसे कहते हैं 'चिराग तले अंधेरा'! जिस राम मंदिर के निर्माण के लिए देश के गरीब से लेकर अमीर तक ने अपनी आस्था की पूंजी सौंप दी, वहां सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर बैठे ये आस्तीन के सांप प्रभु के चढ़ावे पर ही हाथ साफ कर रहे थे। लेकिन कहते हैं ना...भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं...हिडन कैमरे की तीसरी आंख ने इन सफेदपोश चोरों का नकाब उतार फेंका है। पुलिस की गिरफ्त में आए ये सातों आरोपी अब एक-एक राज उगल रहे हैं। SIT और पुलिस का साफ कहना है कि इस साजिश के तार अभी और बड़े लोगों से जुड़े हो सकते हैं और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल रामलला के दरबार में डाका डालने वाले इन गुनहगारों को क्या सजा मिलती है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी। 

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