सुप्रीम कोर्ट से आजम खान को बड़ा झटका: याचिका सुनने से इनकार
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका को वापस संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) के पास भेज दिया है और उम्मीद जताई है कि उच्च न्यायालय इस मामले पर जल्द से जल्द सुनवाई करेगा। इस फैसले के बाद आजम खान और उनके समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि जेल से बाहर आने की उनकी उम्मीदों को एक बार फिर कानूनी पेच ने उलझा दिया है।
कपिल सिब्बल की दलीलें भी नहीं आई काम
आजम खान की तरफ से देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। अदालत के समक्ष अपनी बात रखते हुए कपिल सिब्बल ने बेहद भावनात्मक और कानूनी तर्क दिए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आजम खान की उम्र अब 80 वर्ष हो चुकी है और इस उम्र में उन्हें लगातार मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। सिब्बल ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर खींचा कि जैसे ही आजम खान एक मामले में जमानत पाकर जेल से बाहर आए, तुरंत ईडी ने उन्हें पुराने मामलों में दोबारा गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई का एकमात्र छिपा हुआ मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें राजनीतिक गतिविधियों और आगामी चुनावों से पूरी तरह बाहर रखा जाए।
हालांकि, अदालत ने इन मौखिक दलीलों के आधार पर सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि पहले इस मामले की विधिवत सुनवाई उच्च न्यायालय के स्तर पर ही होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का स्पष्ट निर्देश
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता को सबसे पहले अपनी कानूनी शिकायतें और दलीलें उच्च न्यायालय के समक्ष रखनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी प्रक्रिया का हवाला देते हुए याचिका को उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया और साथ ही उच्च न्यायालय से यह भी अनुरोध किया है कि इस मामले में समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी की जाए।
जेल से बाहर आते ही दोबारा शिकंजा
गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े एक पुराने मामले में आजम खान को जमानत दी थी, जिसके बाद उन्हें लंबी अवधि के बाद जेल से रिहा किया जाना था। लेकिन राहत की सांस लेने से पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में उन्हें फिर से अपनी हिरासत में ले लिया। जेल के गेट से बाहर आते ही दोबारा हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी थी। इसके बाद ईडी उन्हें गाजियाबाद ले गई, जहां मेडिकल जांच के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए डासना जेल भेज दिया। इसी गिरफ्तारी और हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जो अब वापस हाईकोर्ट के पाले में चली गई है।

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